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शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, रायपुर में “Effects of Climate Change and Government Strategies” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन

रायपुर। आज दिनाँक 25/11/2019 को प्रातः 11:00 बजे प्रदेश की अग्रणी तकनीकी संस्था, शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, रायपुर के TEQIP- III परियोजना के अंतर्गत “Effects of Climate Change and Government Strategies” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत, माँ सरस्वती के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर एवं छत्तीसगढ़ राज्य के राजगीत ‘अरपा पैरी के धार’ के साथ हुआ | तत्पश्चात, इस कार्यकम के समन्वयक एवं संयोजक, डॉ. विकास कुमार जैन, सह प्राध्यापक, रसायन शास्त्र विभाग, ने सभी विषय-विशेषज्ञों का संक्षिप्त परिचय दिया तथा, उन्होंने ये कहते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा कि, समय बदल रहा है, इस बदलाव ने समूचे विश्व को बदल दिया है एवं हमारी जलवायु और पर्यावरण भी इस बदलाव से अछूते नही है। उन्होंने अपनी बात इन पंक्तियों के साथ कही “ हम ज़िंदा हैं, क्युकी पर्यावरण है, यही हमारे जीवन का आवरण है, इसके प्रदूषण में जीवन, जीवन नहीं, बल्कि एक मरण है, एक मरण है ” उन्होंने आगे कहा कि हाल के दिनों में वायु और जल कैसे प्रदूषित हुए हैं और अनियंत्रित औद्योगीकरण और शहरीकरण के लिए प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से असंतुलित पर्यावरण, वाज विभिन्न अवांछनीय स्वास्थ्यगत समस्याओं के प्रमुख कारण हैं। अस्थमा, फेफड़े-ह्रदय कि समस्या, कैंसर, आदि बीमारियों से ग्रसित रोगियों की संख्या जो स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा इसी कड़ी में, हमारी छत्तीसगढ़ सरकार इस मामले में पूरी तरह से संवेदनशील है, और प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी के मार्गदर्शन में सरकार कि बहुद्देशीय योजना “नरवा, गरवा, घुरवा, अउ बारी, छत्तीसगढ़ के इही चिन्हारी” परियोजना परंपरागत खेती के साथ-साथ पर्यावरण कि सुरक्षा की दिशा में सरकार कि दूरदर्शिता को चरितार्थ करता है । लेकिन पर्यावरण प्रदूषण का पूर्णरूप से नियंत्रण केवल सरकारी पहलों और प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि इसमें जन-सहभागिता का होना भी अति-महत्वपूर्ण है। डॉ. वाय. पी. बंजारे, TEQIP-III कोऑर्डिनेटर, ने TEQIP परियोजना के विभिन्न पहलुओं को विस्तृत रूप में समझाते हुए कहा कि, पर्यावरण के लिए जागरूकता लेन हेतु संस्था TEQIP-III के सहयोग से संकल्पबद्ध है। डॉ. आर. एस. परिहार, प्राचार्य, शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, रायपुर ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम सभी अतिथियों को अपना बहुमूल्य समय और ज्ञान देने के लिए धन्यवाद दिया और बताया कि, जब कोई नई तकनीक आती है तो उस तकनीक के साथ उसके गुण व दोष दोनों आते हैं। इसलिए इनके गुणों का सदुपयोग कर, दोषों के निराकरण की राह सुनिश्चित करनी चाहिए।| डॉ. एस.डी. अत्री, डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिटीओरोलॉ0जी, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, एवं जलवायु बदलाव के विशेषज्ञ ने ज्ञानवर्धन करते हुए बताया कि, “पर्यावरण को कूड़ादान समझने की भूल कतई ना करें। उन्होंने मौसम के अत्यधिक बदलाव की स्थिति, उसके कारण और परिणाम पर विस्तृत चर्चा की और भारत में प्राकृतिक आपदा सम्बन्धी ज़रूरी जानकारियाँ साझा की उन्होंने बताया कि समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है, औसतन वैश्विक तापमान जो कि लाखों सालों में केवल चार डिग्री ही बढ़ी थी, अब विगत सौ वर्षों में एक डिग्री बढ़ गयी जो कि, सम्पूर्ण मानव जाति के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जलवायु की अनियमित्ता, ग्रीन हॉउस गैस के प्रभाव, ज्वालामुखी का फटना, इत्यादि भी पर्यावरण और जलवायु के बदलाव में कारक का काम करते हैं। अगर भारत जैसे विकासशील और जनसंख्या वाले देश की बात करें तो, यहाँ गर्म और सर्द दोनों तरह की हवाएं लगातार बढ़ रही हैं। डॉ. शंकर जी. अग्रवाल, CSIR-NPL के सीनियर साइंटिस्ट, ने अपने व्याख्यान में कहा कि, प्रदूषकों का मापन प्रदूषण को जानने हेतु आवश्यक है, अतः इस प्रक्रिया में उपकरण, प्रोटोकॉल एवं मानक, परिशुद्धता एवं यथा-तथ्यता की भूमिका अहम् है। उन्होंने 12 pollutants standards, Aerosol Effect, Cooling Effect के बारे में जानकारी दी I प्रदूषक पार्टिकल कैसे हमारे सेहत के लिए हनिकारक है बताया सूक्ष्म पार्टिकल्स(जो कि 300 nm आकर का होता है जो सीधे फेफड़े में जाकर हमारे खून में मिलने का खतरा उत्पन्न करता है। दिल्ली का उदाहरण देकर बताया की प्रोटोकॉल होना बहुत जरुरी है। हवा कि गुणवत्ता, और अन्य ज़रूरी स्त्रोतों के बचाव और सदुपयोग के लिए हम सभी को प्रतिबद्ध होना चाहिए। हमें इसे गंभीरतापूर्वक लेकर इस सुन्दर धरती को जीवन के लिए उपयोगी बनाये रखना ज़रूरी है ताकि, आने वाली पीढियां भी इन प्राकृतिक स्त्रोतों का उपयोग कर सकें इस कार्यक्रम में डॉ. फहमिदा खान, प्राध्यापक, रसायन शास्त्र विभाग, एन.आई.टी. रायपुर के अलावा शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, रायपुर के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षगण और उच्च अधिकारियों जैसे डॉ श्वेता चौबे, डॉ आर. एच. तल्वेकर, श्री वी. एन. सिंह, डॉ अवनीश उपाध्याय, डॉ शैलेषधर दीवान आदि ने भी शिरकत की कार्यकम के समन्वयक एवं संयोजक, डॉ. अजय कुमार त्रिपाठी, सह प्राध्यापक, मेकनिकल विभाग, ने सभी अतिथिगण, प्राचार्य, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं छात्रों का सहृदय धन्यवाद कर कार्यक्रम का समापन किया और कहा कि हमारी संस्था जन मानस के विकास, जलवायु और पर्यावरण को बचाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगी भविष्य में ऐसे और आयोजन किये जायेंगे जिनका सरोकार आप, हम और हर किसी के जीवन के लिए अत्यावश्यक है। यह उदेश्यपूर्ण कार्यशाला सफल रही।

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