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प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज द्वारा आवासीय सामाजिक कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज द्वारा 2 दिवसीय आवासीय सामाजिक कार्यशाला का आयोजन सतनाम धर्मशाला मड़वा सरहद, गिरौदपुरी धाम में दिनाँक 15 व 16 फ़रवरी को प्रदेश के समाज प्रमुखों, शिक्षाविदों ने सामाजिक चिंतन कार्यशाला में शिक्षा, साहित्य और सामाजिक संगठन अपने अपने लिखित विचार प्रस्तुत किया जिसमें गहन चर्चा परिचर्चा हुई।
प्रदेशाध्यक्ष एल एल कोशले जी ,उपाध्यक्ष श्रीमती उमा भतपहरी तथा अन्य कार्यकारिणी पदाधिकारियों के नेतृत्व में प्रदेश के हर जिले से जिला अध्यक्षों, सचिवों तथा कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रशिक्षण का लाभ लिया।कार्यशाला में श्वेत ड्रेस कोड के साथ समस्त प्रतिभागी महिलाओं एवम पुरुषों की उपस्थिति हुई।
कार्यशाला का उदघाटन गुरु घासीदास बाबा जी की वन्दना से हुई। प्रदेशाध्यक्ष जी ने प्रतिभागियों को कार्यशाला के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए
कार्यशाला के विषय-
सामाजिक-
i)सामाजिक संगठन के स्वरूप
ii) स्वयं सेवकों के प्रशिक्षण
iii) समाज के वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान

शैक्षणिक –
i)समाज में शिक्षा का प्रचार-प्रसार
ii)कोचिंग सेंटर की स्थापना
iii)कैरियर गाइडेन्स एवं प्रतिभा सम्मान।

साहित्य- सामाजिक साहित्य की रचना.
इत्यादि से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

कार्यशाला के प्रथम कालखंड में मुख्य प्रशिक्षक राजेंद्र दिवाकर जी ने गुड मेसेज को अंतिम व्यक्ति तक नही पहुचने के विभिन्न कारणों पर चर्चा किया तथा खेल-खेल में गुड मेसेज भेजना सिखाया।
इस उदाहरण के माध्यम से अवगत कराया गया कि गुरु घासीदास जी की शिक्षा, अमृत वाणी एवम संदेशों को किस तरह बिजली के करेंट की भांति विजन 2020-30 बनाकर मानव समाज को संगठित और शिक्षित करना है इसके लिये कार्यशाला का उद्देश्य एक साथ 400 स्कूल एक नाम-एक पाठ्यक्रम-एक शिक्षण पद्धति अपनाकर संचालन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इसके पश्चात समूह विभाजन करके ‘शिक्षा-साहित्य-संगठन’ पर गहन विचार विमर्श हुआ। सभी सदस्यों ने सक्रियता से समूह में अपने विचार रखे। तत्पश्चात प्रत्येक समूह से टोली नायकों के द्वारा विषयांकित सारगर्भित बिंदुओं पर स्वयं संचालित संस्था द्वारा शिक्षा ब्यवस्था से समाज की उत्तरोत्तर विकास को सदन के समक्ष रखा गया। सभी सदस्यों ने सामाजिक उत्थान हेतु आधुनिक एवं मूल्यपरक शिक्षा की आवश्यकता एवं प्रचार प्रसार पर बल दिया। बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु सतनाम संस्कृति एवं संस्कार से युक्त शिक्षा की जरुरत को सर्व सहमति से स्वीकार किया गया।
सायंकालीन सत्र में गुरुवन्दना व मधुर भजन कीर्तन की प्रस्तुति हुई। भोजन ब्यवस्था के लिए शिक्षक तुला राम चातुर्वेदानी(शिक्षक) द्वारा 11000/-(ग्यारह हजार रुपये) की सहयोग दिए जिसके लिए उनका आभार ब्यक्त किया गया।
द्वितीय दिवस की शुरुआत योग एवं ध्यान साधना से की गयी।प्रतिदिन आत्मचिंतन कर स्वयं का अवलोकन करने के लिए कल ,आजऔर आने वाले कल में अपनी भूमिका और सहयोग तय करने प्रेरित किया गया। प्रातःकालीन स्वल्पाहार पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार जिनमें एस आर बांधे जी तथा एस आर बंजारे द्वारा साहित्य के महत्त्व एवं आवश्यकता पर ज्ञानवर्धक उदबोधन कर प्रेरनापूर्ण,समाज के प्रणेताओं की कीर्ति को पाठ्यक्रम में प्रस्तुत करने हेतु प्रेरित किया गया। साहित्य के द्वारा ही ज्ञान एवं संस्कृति का प्रचार प्रसार संभव है।
केंद्रीय स्तर पर सतनाम धर्मशाला मड़वा तपोभूमि गिरौदपुरी धाम से शिक्षण संस्थानों का संचालन होगा ।
CMOH DR.R.K. SONVANI जी के द्वारा समग्र स्वास्थ्य सेवा अभियान के तहत कमजोर, बुजुर्ग एवम दिव्यांगजनों के लिए विभिन्न संसाधनों दिये साथ ही साथ 11000/-कि सहयोग राशि भी दी गयी।
सतनाम संदेश मासिक पत्रिका को घर घर तक पहुचाने के लिये समाजहित में ही रहे कार्यो एवम सहयोग को घर घर से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया तथा पत्रिका के सम्पादक डी एल दिव्यकार जी ने वर्ष 2020 से ही एक आवासीय गुरुकुल की शुरुआत हो रही है जिसके लिये दो लाख रुपये का चेक दिये।
गेलानंद रात्रे ने ‘सतनाम एजुकेशन फाउंडेशन’ की उपलब्धियों के बारे में सदन को अवगत कराया। जिसमें 64 बच्चे समाज के सहयोग से अध्ययनरत हैं, जो प्रतिभावान व आर्थिक रूप से कमजोर हैं। जिसमे से 19 बच्चों का नवोदय विद्यालय में चयन होने की जानकारी दी गई।
सामाजिक संगठनों को मिलकर समाज हित मे कार्य करने के लिये वृहत बायलॉज की आवश्यकता पर चर्चा हुई तथा प्रदेश भर में एक नीति नियम के तहत सामाजिक सुरक्षा, न्याय की ब्यवस्था हेतु ग्राम स्तर से शुरुआत करने पर बल दिया गया।आधुनिकीकरण में नौजवानों द्वारा विवाह,लव मैरिज, अरेंज मैरिज से उत्पन्न समस्याओं की समाधान पर भी चर्चा की गई।
संगठन का स्वरूप राजकाज का ज्ञान कराने वाले सूत्र के माध्यम से ही अठगवां, परिक्षेत्र,100 गवां पर निर्णय लिया गया।
कार्यशाला की उद्देश्य की पूर्ति हेतु राजधानी रायपुर के आसपास में 3 स्कूलों का संचालन करने की जानकारी मिली जिसके लिए समाज से सहयोग की अपील किया गया ।राजधानी रायपुर महिला प्रकोष्ठ सहित दूरस्थ अंचल जिला कोरिया से मातृशक्ति की टीम ने भरपूर सहयोग दिया।
कार्यक्रम के अंत में आर. पी. भतपहरी द्वारा PCSS, आयोजन समिति, प्रशिक्षक तथा प्रतिभागियों को धन्यवाद एवं आभार प्रदर्शन किया गया।
उपर्युक्त जानकारी विजय कुर्रे प्रदेश महासचिव(युवा प्रकोष्ठ)ने दिया।

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