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गिरौदपुरी मेले में बाबा गुरुघासीदास जी की अध्यात्म व शांति का प्रवाह: इंजी.नरोत्तम धृतलहरे

गिरौदपुरी मेला 28 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित

रायपुर। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के रायपुर ग्रामीण युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष नरोत्तम धृतलहरे ने समस्त समाजजनों से अपील किया है की सतनाम पंथ के प्रवर्तक व महान समाज सुधारक संत गुरु बाबा घासीदास की तपोभूमि गिरौदपुरी में पधार कर उनके आदर्शों और उद्देश्यों पर चले। 28 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले इस मेले में दूर -दूर से सतनाम पंथ के मानने वाले पहुंचते हैं. मेले मे भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस व जिला प्रशासन ने काफी संख्या में पुलिस जवानों की ड्युटी लगाई है. 78 मीटर ऊंचा जैतखंंभ लोगों के आकर्षण का केंद्र है जिसे लोग दूर-दूर से देखने आते हैं. इस साल भी मेले में जिला प्रशासन ने 20 किलोमीटर की परिधि मे शराब प्रतिबंधित किया गया है। सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरुघासी दासजी का जन्म 1756 मे गिरौदपुरी में ही हुआ था. यहां अमृत कुंड, चरण कुंड के जल को पवित्र मानते हैं. इसके साथ ही मेले में तीन दिन बाबा गुरुघासीदास दास के जीवन पर आधारित भजन का आयोजन किया जाता है जिससें की समस्त दर्शनार्थियों में उनके गुणों का प्रवाह हो सके। गिरौदपुरी मेले में श्रद्धालु इन स्मारकों में जा कर दर्शन करते है। सतगुरु बाबा घासीदास जी का मुख्य गुरुगद्दी,चरण कुण्ड,अमृत कुण्ड,विश्व का सबसे ऊँचा जैतखाम,चरण चिन्ह स्थल,बाघ पंजा स्थल,छातापहाड़, आदि दार्शनिक स्थल है जो बाबा गुरुघासीदास के जीवन की प्रेरणा देते है।
श्री धृतलहरे ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास ने मनखे-मनखे एक समान का संदेश देकर समता मूलक समाज का संदेश दिया है। बाबा जी ने सत्य अहिंसा का संदेश देकर सभी जीवों के प्रति प्रेम करुणा का उपदेश दिया है। इस अवसर पर श्री धृतलहरे ने समस्त श्रद्धालुओं से विनम्र अपील किया है की मेले में चारो ओर स्वच्छता बनाये रखें, मदिरा सेवन ना करे और संतुलित वातावरण रखें जिससे किसी को भी परेशानी ना हो।

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