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भगवान परशुराम प्राकट्य दिवस उनके पराक्रम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है : रविंद्र कुमार द्विवेदी

रायपुर रविंद्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान परशुराम के पावन प्राकट्य दिवस महान पराक्रम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम तेजस्वी, यशस्वी एवं माता-पिता के परम भक्त थे, शास्त्रों में उल्लेखित है कि भगवान परशुराम ने जहां पिता की आज्ञा से माता का गला काट दिया वहीं पिता से माता को दोबारा जीवित करने का वरदान भी मांगा लिया था, ब्रम्हा वैवर्त पुराण के अनुसार एक बार परशुराम भगवान शिव के दर्शन हेतु कैलाश पर्वत पहुंचे लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें अपने पिता शिव से मिलने नहीं दिया, इस बात से भगवान परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर अपने फरसे से भगवान गणेण के ऊपर प्रहार कर दिया जिससे भगवान गणेश का एक दांत टूट गया, तभी से गणेश जी क ो एकदंत भी कहा जाता है। भगवान परशुराम की महिमा शब्दों की सीमा में संभव नही है, मान्यता है कि जो मुनष्य आज भगवान परशुराम को पूरी भक्तिभाव के साथ उसका पूजा-पाठ करता है, वे अक्षय पूर्ण फल प्राप्त करता है, अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर अभीष्ट सिद्धि एवं मनोरथ पूर्ण करने हेतु हमें ओम जामदग्न्याय विद्म्हे महावीराय धीमहि तन्नो: परशुराम: प्रचोदयात् मंत्र का जाप करना चाहिए।

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