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प्रवासी मजदूरों के मामले में मरकाम पहले अपनी प्रदेश सरकार के सियासी ड्रामों पर रोक लगाएँ : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। श्री उसेंडी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम को भी उनके उस ट्वीट के लिए आड़े हाथों लिया है जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार के पैकेज पर ताना मारते हुए प्रवासी मजदूरों के लिए घड़ियाली आँसू बहाया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों की वापसी और बदहाली के लिए कांग्रेस और उसके गठबंधन की सरकारें ही जिम्मेदार हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पहले अपनी राज्य सरकार के सियासी ड्रामों पर रोक लगाने की पहल करें जो प्रवासी मजदूरों की यथाशीघ्र वापसी में रोड़े अटकाने का काम कर रही है। प्रवासी मजदूरों के मामले में प्रदेश सरकार की सियासी नौटंकियों की पूरी पोल खुल चुकी है और अब कांग्रेस के नेता अपनी प्रदेश सरकार के इस कलंक को धोने की नाकाम कोशिशों में जुट गए हैं। उसोंडी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के साथ प्रदेश की सीमा पर प्रदेश सरकार और उसके नौकरशाह किस तरह अमानवीयता की पराकाष्ठा कर रहे हैं, यह सच हाल के दिनों में खुलकर प्रदेश की जनता के सामने आ चुका है। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सच का सामना करने से कतरा रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि प्रदेश के क्वारेंटाइन सेंटर्स की बदहाली की तो छोड़ो, प्रदेश सरकार ने कोविड-19 अस्पतालों में भी पूरे इंतज़ाम तक किए हैं। जांजगीर-चाँपा से लाए गए पाँच कोरोना पॉजीटिव मरीजों का इलाज बिलासपुर के उस कोविड-19 अस्पताल में शुरू कर दिया गया जहां परीक्षण और उपचार की पूरी तैयारी तक नहीं है। जिस अस्पताल में कर्मचारियों के लिए प्रदेश सरकार पीपीई सूट तक का इंतज़ाम करने में नाकारा साबित हो रही है और उन्हें कपड़े के बने डिलीवरी सूट पहनने दिया जा रहा हो, वह प्रदेश सरकार कोरोना संकट के प्रति कितनी गंभीर है, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। श्री उसोंडी ने कहा कि प्रदेश सरकार के इंतजामात की पोल यह भी है कि उक्त अस्पताल के कर्मी जब अपने ठहरने के स्थान एक लॉज में जाने लगे तो यह सूट उतरवा लिया गया ताकि अगले दिन फिर उसका उपयोग हो सके।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष उसोंडी ने कहा कि बिलासपुर के इस अस्पताल में अब तक न तो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हुआ है और न ही विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपनी डींगें हाँकने की आदत से बाज नहीं आ रही है। प्रदेश के क्वारेंटाइन सेंटर्स सुरक्षा और दीगर इंतजामात की कमी के चलते किसी धर्मशाला से कम नहीं रह गए हैं। अभी हाल ही एक सेंटर में एक व्यक्ति द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने के बाद अब मुंगेली जिले में किरना ग्राम पंचायत के क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए मजदूर योगेश वर्मा की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। पुणे से लौटे इस मजदूर के लिए खाट या पलंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण उसे जमीन पर ही सोना पड़ा। उसेंडी ने प्रदेश सरकार और कांग्रेस नेताओं को केंद्र की आलोचना के बजाय ईमानदारी के साथ प्रदेश में कोरोना के खिलाफ जारी जंग को अंजाम तक पहुँचाने में अपनी ऊर्जा और समय खर्च करने की नसीहत दी है।

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