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कैट ने प्रधानमंत्री मोदी से व्यापारियों को आर्थिक पैकेज देने हेतु हस्तक्षेप का किया आग्रह


व्यापारियों को एमएसएमई सेक्टर में शामिल करने का किया आग्रह

काॅन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को आज भेजे गए एक पत्र में काॅन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने देश में व्यापारिक समुदाय के वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक आर्थिक पैकेज देने हेतु उनके शीघ्र हस्तक्षेप का आग्रह किया है। कैट ने कहा की हमें गहरे अफसोस के साथ बताना होगा कि सबसे बड़े और सबसे प्रतिबद्ध वर्ग में कार्यरत 7 करोड़ व्यापारियों को आर्थिक पैकेज की व्यापक घोषणाओं में शामिल नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने कहा कि देश भर के व्यापारियों का यह मानना है कि यह एक अनजानी चूक है और जानबूझकर की गई उपेक्षा नहीं है क्योंकि पूरे देश में व्यापारियों को पता है कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार घरेलू व्यापार की महत्वतता को सदैव रेखांकित करते रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा लोकल पर वोकल उसी अवधारणा को प्रतिबिंबित करता है । कैट ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को स्मरण कराया की देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में भारत के व्यापारियों ने जी जान से प्रयास किया है जिन्होंने अक्सर अपने स्वयं के जीवन को खतरे में डालते हुए लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को जारी रखा और प्रधान मंत्री ने स्वयं व्यापारियों की इस भूमिका को गत 15 दिन पहले अपने तीन ट्वीट द्वारा प्रशंसा भी की है । उन्होंने आगे कहा कि कैट और भारत के व्यापारी सरकार की हर प्रगतिशील नीति जिसमें जीएसटी कार्यान्वयन, डिजिटल भुगतान, प्लास्टिक और नोटबंदी पर प्रतिबंध आदि पर सदैव क्रियाशील रहे हैं ।
प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कैट ने बताया की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के एक ऑफिस मेमोरेंडम परिपत्र (F-NO.UAM/MC/01/2017&SME) दिनांक 27 जून 2017 द्वारा एनआईसी कोड 46, 47 से व्यापारियों को एमएसएमई से बाहर कर दिया । वित्त मंत्री द्वारा एमएसएमई की परिभाषा के तहत सेवा क्षेत्र को शामिल करना व्यापारियों को ऐसे पैकेज देने के लिए सरकार की मंशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है क्योंकि व्यापारियों को सेवा क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, लेकिन किसी भी स्पष्टीकरण के अभाव में इसका कोई लाभ व्यापारियों को नहीं मिलेगा ।

श्री पारवानी ने आर्थिक पैकेज में व्यापारियों न शामिल किये जाने पर गहरी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया । उन्होंने कहा की देश के लगभग 45 प्रतिशत व्यापारी ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं और उन्हें सीमांत व्यापारी कहा जा सकता है, जबकि 55 प्रतिशत अन्य व्यापारी शहरी क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं जो बहुत ही विषम वित्तीय परिस्थियों से ग्रस्त हैं ।
कैट ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से राहत पैकेज में व्यापारियों के एक विशिष्ट पैकेज देने का आग्रह करते हुए कहा की लॉक डाउन की अवधि में व्यापारियों को कर्मचारियों को वेतन के भुगतान जैसे विभिन्न वित्तीय दायित्वों को पूरा करना होगा, जीएसटी का भुगतान, आयकर और अन्य सरकारी भुगतान, ईएमआई, व्यापारियों द्वारा लिए गए ऋण और अन्य आकस्मिक खर्चों पर बैंक ब्याज सहित अन्य अनेक वित्तीय दायित्व पूरे करने बोझ भी हैं वहीँ दूसरी ओर व्यापारिक लेनदेन में व्यापारियों द्वारा दिए गए उधार माल की राशि बाजारों के खुलने के दिन से 45-60 दिनों के अंदर वापसी की शुरुआत होने की सम्भावना है। ये हालात वित्तीय संकट के इन समय में व्यापारियों के लिए बहुत भारी होंगे और सरकार के पर्याप्त समर्थन के अभाव में सम्भावना इस बात कि है की लगभग 20 प्रतिशत सीमांत व्यापारियों के पास व्यापार बंद करने के अलावा और कोई अन्य विकल्प नहीं होगा, लेकिन और व्यापारियों को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

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