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साय की नियुक्ति से प्रदेश भाजपा में अभूतपूर्व उत्साह का वातावरण…..

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव साय की नियुक्ति से प्रदेश भाजपा में अभूतपूर्व उत्साह का वातावरण है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष के रूप में श्री साय तीसरी बार यह ज़िम्मा संभाल रहे हैं। इससे पहले 2006 से 2010 और फिर 2014 में पार्टी की कमान उनके हाथ में रही। 1999 से 2014 तक श्री साय रायगढ़ से सांसद रहे। श्री साय के प्रदेश अध्यक्ष रहते लोकसभा की 11 में से 10 सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी।

जशपुर जिले के कांसाबेल ब्लॉक के बगिया गांव में एक आदिवासी किसान परिवार बुधुनाथ साय के पुत्र श्रीराम प्रसाद साय के यहाँ 21 फरवरी 1964 को जन्मे श्री साय ने सरपंच से लेकर विधानसभा, लोकसभा से होकर केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर पूरा किया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक बार फिर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का पद दिया जाना उनकी राजनैतिक योग्यता, प्रतिबध्दता, सामाजिक स्वीकार्यता को प्रदर्शित करता है। श्री साय देश में ऐसे गिने-चुने राजनेताओं में से एक हैं जिन्हें गांव की पंचायत से लेकर विधानसभा एवं लोकसभा में निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में आम जनता का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य प्राप्त है।

महज 26 वर्ष की आयु में उन्हें पहली बार विधायक बनने का अवसर मिला। जशपुर जिले के तपकरा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1990 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। मात्र तीन साल के कार्यकाल में उन्हें दूसरी बार विधायक बनने का पुन: अवसर हुआ। वर्ष 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव हुए जिसमें वे लगातार दूसरी बार तपकरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्हें 1999 के लोकसभा चुनाव में सांसद बनने का अवसर मिला। वर्ष 1999 में रायगढ़ संसदीय क्षेत्र सांसद निर्वाचित हुए श्री साय ने लगातार चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने इस राजनीतिक सफर में प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व का भी बखूबी निर्वहन किया।

वर्ष 2006 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष होने का गौरव प्राप्त हुआ। वे सात अगस्त 2006 को छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। प्रदेश अध्यक्ष व सांसद के दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्होंने पार्टी को नई उर्जा प्रदान की। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव उन्हीं के नेतत्व में लड़ा गया। उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में प्रदेश की 11 लोकसभा सीट में से 10 सीट पर भाजपा ने परचम लहराया, जिसमें रायगढ़ संसदीय क्षेत्र से उन्हें तीसरी बार सांसद निर्वाचित होने का अवसर प्राप्त हुआ जबकि 2014 में वे चौथी बार रायगढ़ लोक सभा क्षेत्र के सांसद निर्वाचित हुए। उनके प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में वर्ष 2008 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव हुए। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 29 विधानसभा क्षेत्र में से 20 सीट पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष श्री साय का बेहद सराहनीय योगदान रहा।

क़रीब 35 वर्ष के राजनीतिक सफर में ऐसी कई कड़ियाँ हैं जो उनके बेहद संजीदा राजनीतिज्ञ होने व उन्हें सफल राजनीतिक जीवन से जोड़ती है। श्री साय को 1998 के विधानसभा चुनाव में तपकरा सीट पार्टी का प्रत्याशी नहीं बनाया गया, लेकिन वे एक साल बाद ही उन्हें लोकसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी बनने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्हें पत्थलगांव सीट से वर्ष 2008 में पार्टी का प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन वे पराजित हो गए। पार्टी ने उन्हें तीसरी बार वर्ष 2009 में लोकसभा सीट के प्रत्याशी बनाया। उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता व मिलनसारिता का प्रभाव उनके सामाजिक जीवन में भी परिलक्षित होता है। दो लाख मतों से 2014 के लोकसभा चुनाव की उनकी जीत ने तो उनकी हर-जीत के रिकॉर्ड ही तोड़ दिए थे।

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