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पपीता बेचकर अर्जित की 2 लाख रुपये की आमदनी

बेमेतरा। कृषि एवं कृषि आधारित कार्यों को बढ़ावा देने में महात्मा गांधी नरेगा के योगदान के बारे में लोगों को जागरूक करने का कार्य जिले में सतत् रूप से किया जाता रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम से मिले संसाधनों और परस्पर सहकार की भावना ने ग्राम मुंगेली ग्राम पंचायत बाराडेरा विकासखंड एवं जिला बेमेतरा के किसान श्रीमति कुंज बाई पति उमाषंकर साहू की जिंदगी बदल दी। विकासखण्ड मुख्यालय से लगभग 24 किमी दूर बसा यह गांव, जहां किसान अभी भी पुरानी पद्धति से खेती करते है वहां श्रीमति कुंज बाई और उमाशंकर साहू ने करीब 2 एकड़ भूमि में महात्मा गांधी नरेगाके माध्यम से पपीता के दो हजार पौधों लगाए थे। 1 साल पहले 13 अगस्त 2020 को यह कार्य प्रारंभ हुआ था। जिसमें रोपे गए पौधांे से लगभग तीन लाख रूपये का पपीता इनके द्वारा बेचा गया है और पुनः दो हजार छः सौ पौधे निजी व्यय लगाया गया है। श्रीमति कुंजबाई साहू एवं उनका परिवार एक लघु कृषक परिवार है जो कि खेती कार्य में रूचि रखते है। उनके द्वारा 4 एकड़ रकबे में प्रचलित फसल धान की खेती कर जीवन यापन किया जाता रहा है। महात्मा गांधी नरेगा एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण में सब्जी एवं फल की खेती से होने वाले लाभ के बार में जानकर उनका रूझान इस ओर बढा, शासकीय अनुदान प्राप्त करने विभाग से संपर्क स्थापित किया गया । इसके लिए उद्यानिकी विभाग एवं महात्मा गांधी नरेगा से संयुक्त रूप से लाभ प्राप्त करने हितग्राही द्वारा प्रयास किया गया।

परम्परागत खेती से हटकर किसी अन्य प्रकार की खेती के लिए ग्रामीण कृषक त्वरित रूप से तैयार नही होते उन्हे नये प्रकार की खेती से प्रत्यक्ष रूप से लाभ एवं हानि के विषय में स्पष्ट जानकारी नही होने से उन्हे अपनी जमीन एवं फसल को नुकसान पहुचाना, महसूस होता है जो कि हितग्राही को विभिन्न प्रषिक्षण एवं अन्य हितग्राहियों से सम्पर्क स्थापित कर हितग्राही को उसके प्रत्यक्ष लाभ के बारे में अवगत कराया गया ।
श्रीमति कुंजबाई एवं इनका परिवार महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत पंजीकृत है और इनका जॉबकार्ड सीएच-03-002-044-003/182-ए है, इनके निजी भूमि में पपीता बाड़ी की स्वीकृति हेतु उद्यानिकी विभाग एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महात्मा गांधी नरेगा मद से संयुक्त अभिसरण कर कार्य की स्वीकृति प्रदाय की गई थी। जिसमें उद्यानिकी विभाग द्वारा विभागीय मद से राशि रू 0.40 लाख रूपये एवं राशि रू. 0.87 लाख रूपये मनरेगा से स्वीकृति दी गई थी।

पपीता बेचकर कमाया 2 लाख रुपये
कृषक द्वारा पपीते की खेती के दौरान ही मिक्स क्राफट के सिद्वांत का पालन करते हुए पपीते के पौधे के बीच में खाली स्थान पर भुटटा (मक्का), कोचई के साथ अन्य सब्जी की भी खेती की गई। अनुमान से अधिक 01 वर्ष में ही लगभग रू 2.00 लाख से अधिक का लाभ श्रीमति कुंजबाई साहू एवं उनके परिवार को हुआ। हितग्राही आज आर्थिक रूप से सशक्त है एवं परिवार के भरण-पोषण के लिए स्वतः सक्षम होने के साथ-साथ गांव के श्रमिकों को भी अपनी खेती के माध्यम से रोजगार प्रदाय कर रहे है । इनके द्वारा किये जा रहे इस अभिनव प्रयास और उत्तम कार्य को देखते हुए जिला कलेक्टर द्वारा इनको पुरस्कृत भी किया गया है। जिससे ग्रामीण स्तर पर अब इनकी पहचान सम्पन्न किसान के तौर पर होने लगी है और इनका मान-सम्मान बढ़ा है।

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