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कैट ने सीसीआई से अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर तलाशी और जब्ती कार्रवाई की मांग की

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू, अमर गिदवानी, प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी संजय चौंबे ने बताया कि ई-कॉमर्स कंपनियों अमेज़न और फ्लिपकार्ट के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच में तेजी लाने के लिए सीसीआई के चैयरमैन श्री अशोक कुमार गुप्ता को आज भेजे गए एक पत्र में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने मांग की है कि सरकार की एफडीआई नीति, 2018 के प्रेस नोट 2 में बताए गए प्रभुत्व गैर-प्रतिस्पर्धी व्यवसाय प्रथाओं की शिकायतों के संदर्भ में अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों के व्यापार मॉड्यूल मे चल रही जांच में तेजी लाने के लिए तत्काल कदम उठाएं जिनके द्वारा अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट वर्तमान में भी प्रतिस्पर्धा और नियमों का उल्लंघन करते हुए भारत के ई कॉमर्स में उसी मॉडल पर व्यापार कर रही हैं जिनकी शिकायत सीसीआई से की गई है !

कैट ने सीसीआई से मांग की है की जांच होने तक इन कंपनियों को अपने पोर्टल संचालन को अस्थायी तौर पर जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक अपने पोर्टलों को निलंबित करने का निर्देश देने की मांग की है। कैट ने यह भी मांग कि है की जांच अधिकारी को सभी संबंधित दस्तावेजों, कंप्यूटरों, हार्ड डिस्क और अन्य प्रासंगिक डेटा को जब्त करने का आदेश भी दिया जाए ! कैट ने कहा की यह मानने का उचित आधार है कि जांच से संबंधित दस्तावेजों या उपकरणों के नष्ट, कटे-फटे या उसमें तोड़ फोड़ करने की इन कंपनियों के द्वारा बड़ी संभावना है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी और प्रदेश अध्यक्ष श्री जितेन्द्र दोशी ने कहा कि अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा चल रही जांच पर रोक लगाने के लिए अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों की अपील को खारिज करने के बाद यह उम्मीद थी की जांच में तेजी आएगी ! हालाँकि ऐसा लगता है कि जाँच कछुए की गति से की जा रही है और इस बीच ये दोनों कंपनियाँ अपनी व्यावसायिक प्रथाओं जो जांच के दायरे ,में है जिसके परिणामस्वरूप ई कॉमर्स व्यापार उच्च असमान स्तर की प्रतिसर्धा का क्षेत्र बन गया है जो भारत के लोगों और व्यापारियों के काम करने के मौलिक अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो जांच का मूल उद्देश्य खतरे में पड़ जाएगा और चर्चित कहावत “न्याय में देरी न्याय से वंचित है” सच हो जायेगी ।

श्री पारवानी एवं श्री दोशी ने मांग को सही ठहराने के लिए उद्धृत किया है कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 41, कंपनी अधिनियम की धारा 220 और 240A के साथ पढ़ी जाती है जिसके अनुसार सीसीआई के जांच महानिदेशक को तलाशी और जब्ती का अधिकार देती है। इस संदर्भ में कैट ने सीसीआई बनाम जेसीबी इंडिया लिमिटेड के मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 15 .1 . 2019 के आदेश का हवाला दिया है जिसमें उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को अधिनियम की धारा 41(3 ) के साथ पढ़ें जिसके द्वारा जांच महानिदेशक को जांच करने के लिए सक्षम बनाया गया था और उन्हें तलाशी और सामान को जब्त करने का अधिकार दिया गया है ! कोर्ट ने यह भी कहा की केवल तलाशी ही अधिनियम के संदर्भ में जांच के उद्देश्यों के लिए पर्याप्त नहीं होगी औरउसके लिए जब्ती का अधिकार भी होना आवश्यक है

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