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गर्भाशय फाइब्रॉएड क्या हैं? इसकी देखभाल कैसे करें

रायपुर। राजधानी रायपुर की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ सौभाग्य हॉस्पिटल मदर एवं चाइल्ड केयर सेंटर की संचालिका डॉ. शालिनी अग्रवाल ने बताया कि महिलाओं में होने वाली गंभीर समस्या गर्भाशय फाइब्रॉएड क्या हैं। इसकी जटिलताएं क्या है, इसकी देखभाल और उपचार कैसे करें….
गर्भाशय फाइब्रॉएड क्या हैं?   गर्भाशय फाइब्रॉएड एक सौम्य ट्यूमर हैं जो गर्भाशय ( गर्भ ) में उत्पन्न होते हैं । यद्यपि ये गर्भाशय की दीवार ( मायोमेट्रियम ) के समान चिकनी मांसपेशी फाइबर से बने होते हैं। वे सामान्य मायोमेट्रियम की तुलना में बहुत अधिक सघन होते हैं। गर्भाशय फाइब्रॉएड आमतौर पर गोल होते हैं। गर्भाशय के भीतर उनके स्थान के आधार पर गर्भाशय फाइब्रॉएड का अक्सर वर्णन किया जाता है। फाइब्रॉएड गर्भाशय के अस्तर के साथ स्थित हैं। प्रारंभिक गर्भावस्था में संभावना कम हो जाती है कि फाइब्रॉएड विकसित होगा। फाइब्रॉएड उन लड़कियों में नहीं देखा गया है जो यौवन तक नहीं पहुंची हैं। लेकिन किशोर लड़कियों में फाइब्रॉएड शायद ही कभी विकसित हो सकता है। फाइब्रॉएड के विकास के एक बढ़ते जोखिम में 10 वर्ष की आयु से पहले पहले मासिक धर्म मे नार्चे , शराब का सेवन , गर्भाशय में संक्रमण और उच्च रक्तचाप शामिल हैं।
गर्भाशय फाइब्रॉएड क्यों किया जाता हैं ?  फाइब्रॉएड वाली अधिकांश महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि , असामान्य गर्भाशय रक्तस्राव फाइब्रॉएड का सबसे आम लक्षण है। यदि ट्यूमर गर्भाशय के अस्तर के पास हैं , या अस्तर के रक्त प्रवाह में हस्तक्षेप करते हैं , तो वे भारी अवधि , दर्दनाक अवधि , लंबे समय तक या मासिक धर्म के बीच स्पॉटिंग का कारण बन सकते हैं।फाइब्रॉएड के कारण अत्यधिक रक्तस्राव वाली महिलाओं में लोहे की कमी से एनीमिया हो सकता है । गर्भाशय फाइब्रॉएड जो पतित हो रहे हैं वे कभी – कभी गंभीर , स्थानीय दर्द का कारण बन सकते हैं। फाइब्रॉएड भी उनके आकार , गर्भाशय के भीतर स्थान , और आस – पास के श्रोणि अंगों के कितने करीब हैं , इसके आधार पर कई लक्षण हो सकते हैं। बड़े फाइब्रॉएड हो सकते हैं।
●  श्रोणि क्षेत्र में दबाव होना।
● पेडू में दर्द होना।
● बार – बार या बाधित पेशाब के साथ मूत्राशय पर      दबाव  पड़ना।
 ● दर्दनाक और बाधित शौच के साथ मलाशय पर दबाव पड़ना।
गर्भाशय फाइब्रॉएड कैसे की जाती हैं ?  गर्भाशय फाइब्रॉएड की जांच करने के लिए आपके चिकिस्तक कुछ सवाल पूछ सकते है या श्रोणि का परीक्षा करेंगे । यह देख सकते है की गर्भ के आकार में बदलाव है । फाइब्रॉएड का निदान हमेशा आसान नहीं होता है । मोटे होने से फाइब्रॉएड का पता लगाने में मुश्किल हो सकती है । फाइब्रॉएड की तलाश के लिए आपको इन परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।
●  जैसे – अल्ट्रासाउंड ध्वनि तरंगों का उपयोग करके गर्भाशय की तस्वीर बनाता है।
●  एमआरआई तस्वीर बनाने के लिए शक्तिशाली मैग्नेट और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है ।
● सलाइन इन्फ्यूजन सोनोग्राम ( हिस्टेरोसोनोग्राफी) सलाइन को गर्भाशय में अंतःक्षिप्त किया जाता है ताकि अल्ट्रासाउंड का उपयोग करके गर्भाशय को देखना आसान हो सके ।
● हिस्टेरोस्कोपी योनि के अंदर और गर्भाशय के अंदर की जांच करने के लिए एक लंबी , पतली ट्यूब का उपयोग किया जाता है।
●  एंडोमेट्रियल बायोप्सी गर्भाशय के अस्तर के एक छोटे टुकड़े को निकालता है ताकि कैंसर की जाँच की जा सके अगर आपको असामान्य ब्लीडिंग है ।
गर्भाशय फाइब्रॉएड के उपचार के लिए कई तरीको का उपयोग किया जा सकता है। 
●सर्जरी ( हिस्टेरेक्टॉमी , मायोमेक्टॉमी , क्रायोसर्जरी)।  एमआरआई – निर्देशित उच्च – तीव्रता केंद्रित अल्ट्रासाउंड।
● गर्भाशय धमनी का आलिंगन।
● गर्भाशय धमनी रोड़ा ( यूएओ ) , जिसमें पॉलीविनाइल अल्कोहल मोतियों को इंजेक्ट करने के विपरीत शामिल गर्भाशय धमनियों को बंद करना शामिल है।
●  गैर – सर्जिकल तकनीक आमतौर पर प्रकृति में हार्मोनल होती हैं और इसमें ड्रग्स का उपयोग शामिल होता है जो अंडाशय से एस्ट्रोजन के उत्पादन को बंद कर देते हैं । ये दवाएं तीन से छह महीने के लिए दी जाती हैं । सफल होने पर वे फाइब्रॉएड को 50 % तक कम कर सकते हैं ।
गर्भाशय फाइब्रॉएड के बाद देखभाल कैसे करें ?
 गर्भाशय फाइब्रॉएड के बाद निम्न बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है ।
 ● फाइब्रॉएड की पुनरावृत्ति के लिए जाँच करवाना ।   ● अनुवर्ती परीक्षण आवश्यक होता है ।
 ●  पोस्ट प्रक्रिया श्रोणि परीक्षाएं होनी चाहिए।
 ● पीरियड्स के दौरान हाइजीन मेंटेन करना जरूरी है।
अगर अत्यधिक जटिलता हो रही है तो चिकिस्तक से संपर्क कर सकते हैं।
गर्भाशय फाइब्रॉएड के बाद क्या जटिलाएं आ सकती हैं ? – 
गर्भाशय फाइब्रॉएड के बाद निम्न जोखिमों का सामना करना पड़ सकता हैं।
 ●  गंभीर दर्द या बहुत भारी रक्तस्राव जिसमें आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता होती है।
● फाइब्रॉएड का मुड़ना इसमें अवरुद्ध रक्त वाहिकाओं का कारण बन सकता है जो ट्यूमर को खिलाते हैं। ऐसा होने पर आपको सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
 ● भारी रक्तस्राव से एनीमिया ( पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाओं का न होना )।
 ● मूत्र पथ के संक्रमण – यदि फाइब्रॉएड मूत्राशय पर दबाव डालता है , तो आपके मूत्राशय को पूरी तरह से खाली करना मुश्किल हो सकता है।
 ●  बांझपन , दुर्लभ मामलों में।
Dr shalini agrawal raipur
डॉ शालिनी अग्रवाल
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
सौभाग्य हॉस्पिटल मदर एवं चाइल्ड केयर सेंटर रायपुर (छ.ग.)

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