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जिले में आने वाले पांच दिनों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना

धान के फसल को तना छेदक, भूरा माहो एवं गंगई कीट प्रकोप से बचाने करें सतत निगरानी

कोरबा। मौसम विज्ञान विभाग द्वारा कोरबा जिले में आने वाले पांच दिनों में जिले के अधिकांश स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान अधिकांश स्थानों पर बादल छाए रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने की संभावना है। आगामी मौसम को ध्यान में रखते हुए जिले के किसानों के लिए फसल सुरक्षा एवं पशुपालन से संबंधित सलाहकारी निर्देश मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। किसानों को रोपा किए गए खेतों में पांच सेन्टीमीटर से अधिक पानी नहीं भरने देने, पानी अधिक होने पर तत्काल खेत से बाहर निकालने के निर्देश दिए गए हैं। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में जल निकास की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया है। सितंबर माह के दौरान धान के फसल में तना छेदक, भूरा माहो एवं गंगई कीट प्रकोप होने की संभावना रहती है। इसको ध्यान में रखते हुए किसानों की फसलों की सतत निगरानी करने एवं कीट नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में प्रकाश प्रपंच या समन्वित कीट नियंत्रण विधि का प्रयोग करने के लिए कहा गया है। कीट प्रकोप अधिक होने की स्थिति में मौसम खुलते ही अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क कर कीटनाशी दवाईयों का छिड़काव करने का भी सलाह जारी किया गया है। धान की फसल में झुलसा रोग के लक्षण नाव आकार के धब्बे के रूप में दिखते ही ट्राई साइक्लोजोल 0.6 ग्राम प्रतिलीटर पानी का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। धान में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फिरोमेन ट्रैप 2-3 प्रति एकड़ का उपयोग करने एवं प्रकोप पाए जाने पर 8-10 फिरोमेन ट्रेप का उपयोग करने कहा गया है। किसानों को धान फसल नहीं लगाने की स्थिति में कुल्थी, मूंग, उड़द, मक्का, सब्जी एवं चारे वाली फसलों की बुआई कर सकते हैं।
मौसम विज्ञान विभाग द्वारा बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन एवं मृदा की तैयारी के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह भी जारी किए गए हैं। इसके अंतर्गत पपीते में फल झड़न को रोकने के लिए 20 पीपीएम की दर से नेप्थलीन एसिटीक एसिड का छिड़काव करने कहा गया है। जून में रोपित मुनगे की फसल एवं पिछले वर्ष रोपित आम के पौधों में सधाई के लिए कांट-छांट करने के सलाह दिए गए हैं। सितंबर माह में बकरियों को एंटोरोटॉक्सीमिया नामक बीमारी का टीका लगवाने के लिए कहा गया है। बढ़ते मेमनों को छह से 10 सप्ताह की उम्र में इस बीमारी का टीका लगवाना चाहिए। मुर्गियों में खूनी दस्त से बचाव के लिए 30 ग्राम वर्मिक्स पाउडर पानी में मिलाकर तीन से पांच दिनों तक पिलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। फल एवं सब्जी के खेतों में पानी भरे स्थान में जल निकास की व्यवस्था करने के भी सलाह दिए गए हैं।

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