धर्मवीर बसंत अग्रवाल के जन्मदिवस पर भक्तिमय हुई गुढ़ियारी, गूंजे ‘राम आएंगे’ के जयघोष, श्याम बाबा के दरबार में झूमे श्रद्धालु

रायपुर: राजधानी रायपुर की धर्मनगरी गुढ़ियारी सोमवार को पूरी तरह से भक्ति के सागर में डूबी नजर आई। अवसर था श्री रामजानकी प्राण प्रतिष्ठा वार्षिक महोत्सव और श्री हनुमान मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित भव्य श्री श्याम बाबा महोत्सव का, जिसे समाजसेवी एवं धर्मवीर बसंत अग्रवाल के जन्मदिवस के पावन उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
मारुति मंगलम भवन में आयोजित इस भव्य समारोह में जैसे ही ‘मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे…’ भजन के स्वर गूंजे, वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। समाजसेवी बसंत अग्रवाल के जन्मदिवस को नितांत धार्मिक और सात्विक रूप में मनाते हुए आयोजकों ने “करने वाले बालाजी, करवाने वाले बालाजी” के भाव को चरितार्थ किया। आयोजन समिति ने बताया कि यह पूरा महोत्सव पूर्णतः बाबा श्री श्याम और बालाजी महाराज की कृपा से संभव हो पाया है। इस मौके पर बसंत अग्रवाल ने श्री हनुमान मंदिर में आरती कर प्रभु के चरणों में नमन करते हुए अपना जीवन समाज और धर्म के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प दोहराया।
महोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाने के लिए देश के कोने-कोने से सुप्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुंबई से आए प्रमोद त्रिपाठी, जयपुर की रजनी राजस्थानी, दिल्ली की वंशिका अग्रवाल और संबलपुर के राजीव पूरी ने जब भजनों की तान छेड़ी, तो पूरा माहौल श्याम रंग में रंग गया। वहीं, रायपुर के लोकप्रिय भजन गायक राजू महाराज ‘पागल’, राहुल सोनी और विनय अग्रवाल ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में भक्त अपने स्थान पर थिरकते नजर आए।
इस धार्मिक अनुष्ठान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) छत्तीसगढ़ के सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ दक्षिण कौशल के पीठाधीश्वर महंत राजिव लोचन दास, दीनानाथ शर्मा, श्रवण शर्मा, विनोद अग्रवाल, आजाद गुर्जर, हेमेंद्र साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक मंच पर उपस्थित थे। धर्मवीर बसंत अग्रवाल के जन्मदिन और श्याम महोत्सव के इस अद्भुत संगम में भारी संख्या में धर्मप्रेमी जनता और नगरवासी शामिल हुए।
भक्तिमय संगीत के साथ-साथ आयोजन में सेवा का भी अनूठा संगम देखने को मिला। महोत्सव के दौरान शाम 5 बजे से प्रभु की इच्छा तक विशाल भंडारे (भोजन प्रसादी) का आयोजन किया गया। इस महाभंडारे में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने सात्विक भोजन प्रसादी ग्रहण की। देर शाम तक चले इस भंडारे में समाज के हर वर्ग के लोगों ने प्रसाद पाया, जो सामाजिक समरसता का परिचायक बना।









