पाँच साल बाद मजदूर को मिला न्याय, पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में सफल हुआ संघर्ष

रायपुर। लगातार पाँच वर्षों से मानसिक और आर्थिक शोषण का शिकार रहे एक मजदूर परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया। वार्ड क्रमांक 05, उरला के पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में हुए जनसंघर्ष के बाद उरला के फैक्ट्री प्रबंधन को मजदूर का वैधानिक हक देने पर मजबूर होना पड़ा।
पार्षद बेदराम साहू ने बताया कि मजदूर मंतराम साहू, पिता नारायण साहू, निवासी मटखनवापा पारा, वार्ड क्रमांक 05, उरला को पिछले पाँच वर्षों से कंपनी द्वारा मेहनताना और वैधानिक राशि से वंचित रखा गया था। पीड़ित मजदूर परिवार न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुका था। यहां तक कि तहसील धरसीवा द्वारा कुर्की वारंट जारी होने के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने कोई संवेदनशील या वैधानिक कार्रवाई नहीं की।
बेदराम साहू ने कई बार कंपनी प्रबंधन से निवेदन कर मजदूर को उसका हक दिलाने की कोशिश की, लेकिन जब हर स्तर पर अनदेखी हुई, तब अंततः मजबूर होकर कंपनी का घेराव किया गया। इस दौरान वार्ड के सैकड़ों नागरिक और मजदूर परिवार एकजुट होकर संघर्ष में शामिल हुए।
जनदबाव और एकजुटता के चलते आखिरकार कंपनी प्रबंधन ने मजदूर मंतराम साहू को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) का चेक प्रदान किया, जो उसकी मेहनत और अधिकार की पूरी राशि थी।
इस न्यायोचित संघर्ष में सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही। प्रमुख रूप से बेदराम साहू पार्षद, भागीरथी यादव (अध्यक्ष, मां बंजारी मंडल), डेविड साहू, गौतम साहू, डोमेश देवांगन, अंकित देवांगन, नानचंद साहू, प्रकाश दिवान, अजय साहू, अश्वनी साहू, अश्वनी जंघेल, जीवन साहू, रामपाल साहू, युगल साहू, नंदकुमार यादव, राकेश सेन, गेंदलाल साहू, उमेश धीवर, युवराज साहू, नरेश साहू, श्रवण साहू, मीनू, राजवंती विश्वकर्मा, आरती नायक, सुखबाई नायक, रोशन दास, विशाल पांके, गेंददास मानिकपुरी सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।
पार्षद बेदराम साहू ने कहा,हमारा उद्देश्य केवल और केवल मजदूरों को न्याय दिलाना है। जब तक अंतिम मजदूर को उसका हक नहीं मिलता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।









