लोक कला महोत्सव,मंड़ई एवं सम्मान समारोह में शिरकत करेंगे कई दिग्गज कलाकार

गरियाबंद। विलुप्त होती लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के पावन उद्देश्य को लेकर संझा बिहनिया साहित्य समिति एवं युवा मंडल द्वारा ग्राम लोहरसी में भव्य लोक कला महोत्सव,मंड़ई एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपरा और कलात्मक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की एक सशक्त पहल हैम
जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में (अभिनेत्री) मोना सेन अध्यक्ष फिल्म विकास निगम छ.ग. शासन रहेंगे। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के सचिव डॉ अभिलाषा बेहार साथ ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शिवांगी चतुर्वेदी जिला पंचायत (सभापति) गरियाबंद, इंद्रजीत महाड़िक जिला पंचायत सदस्य पूर्व जनपद अध्यक्ष पुष्पा साहू, डॉ रूपसिंग साहू सामाजिक कार्यकर्ता एवं नीता सोहन साहू जनपद सदस्य के आतिथ्य में। इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त कलाकारों का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने लोक कला को केवल साधना ही नहीं, बल्कि अपनी जीवन-शैली बना लिया है। इनमें गरियाबंद जिले के गौरव, सुप्रसिद्ध रंगकर्मी भूपेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ के सुविख्यात गायक पंडित विवेक शर्मा एवं पुरुषोत्तम चंद्राकर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
साथ ही स्थानीय एवं क्षेत्रीय कला-साधकों का भी सम्मान किया जाएगा, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कवि नूतन लाल साहू, लोक कलाकार गौकरण मानिकपुरी, संगीत शिक्षक तुलाराम साहू, आनंद निषाद, लोक कलाकार सुरेंद्र संजना सिन्हा, लोक गायक मनेश्वर ध्रुव, पंडवानी गायिका गंगा बाई मानिकपुरी, साहित्यकार ईश्वर तारक गीतकार-कवि गोकुल साहू, तथा ग्राम लोहरसी के बुजुर्ग एवं सम्माननीय जन पुरोहित पं. माखन प्रसाद तिवारी, गंगूराम एवं छोटे लाल जी सम्मिलित हैं।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने हेतु कलाकारों की सशक्त प्रस्तुतियों की भी श्रृंखला रहेगी। रात्रिकालीन सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध स्वर-कोकिला कविता वासनिक जी द्वारा “अनुराग धारा” की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं पैरी सरगम पंडवानी गायिका गायत्री राजपूत एवं “मया के संदेश” के माध्यम से गौकरण मानिकपुरी अपनी लोक-कलात्मक अभिव्यक्ति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।
आयोजक समिति ने इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक संगीत एवं परंपरा का रसास्वादन करने की हार्दिक अपील की है। यह महोत्सव न केवल कलाकारों का सम्मान है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का उत्सव भी है।









