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श्री गुरू गोविन्द सिंघ जी का संदेश- “मानस की जात सबै एकै पहिचानबों”

सिक्खों के दसवें गुरू “श्री गुरुगोविन्द सिंघ जी” का जन्म 22 दिसंबर 1666 में “श्री गुरूतेग बहादर साहिब जी तथा “माता गुजर कौर जी” के घर “पटना साहिब” में हुआ। बचपन का नाम गोबिंद राय था। “श्री गुरुगोविन्द सिंघ साहिब जी” अपने पास एक “बाज” पक्षी रखा करते थे। इसी कारण “बाजा वालें” शब्द उनकी शोभनीय उपमा बन गई।

श्री गुरुगोविन्द सिंघ जी के पवित्र चरणों का स्पर्श इस धरती को प्राप्त हुआ। आज भी सारे विश्व में सिक्खों के बीच “पटना साहिब” का स्थान बड़ा ही सम्माननीय है। श्री गोविन्द सिंघ के जन्म दिवस पर लाखों सिक्ख श्रद्धालु “पटना साहिब” अपनी श्रद्धा निवेदित करते है।

श्री गुरू गोविन्द सिंघ जी सारी मानवता को संदेश दे रहे है-

कि प्रभु एक हैं, उसके द्वारा पैदा की गई सारी मानवता भी एक है। “जिन प्रेम किओं तिन ही प्रभ पाइओं”

प्रभु के साथ सच्चे दिल से प्रेम करने से ही जीव आत्मा का परमात्मा के साथ मिलाप हो सकता है।

“सवा लाख से एक लड़ाऊं,

तबै गोबिंद सिंघ नाम कहाऊ”

श्री गुरु गोविंद सिंघ जी ने एक सिंघ की ताकत सवा लाख सिपाहियों के बराबर मानी है।

दशमेश पिता ने जब खंड़े बाटे का अमृत तैयार किया और सबको एक ही बांटे में अमृत के घुट भर-भर के पीने को कहा और जात-पात छुत अछुत के भरम भूलेखे दूर कर दिये।

दशम पातशाह “श्री गुरू गोविन्द सिंघ जी” गुरू सिक्खी का प्रचार करते हुए नांदेड़ साहिब माधोदास के डेरे जा पहुंचे। माधोदास डेरे पर नहीं था। श्री गुरू गोविन्द सिंघ जी सीधे माधोदास के पलंग पर जा कर विराजमान हो गये, जो जादुई पलंग था।

माधवदास जब डेरे आया, गुरूजी को पहचान न सका। पलंग पर बैठे गुरूजी को देख गुस्से में लाल-पीला हो गया, और उन पर अपने जादू-मंत्र चलाने लगा। पलंग पलटाने का प्रयास किया, पर सभी जादू-मंत्र फेल हो गये। जब समझ में आया तो वह “श्री कलगीधर पिताजी” के चरणों में जा गिरा।

माधोदास ने बिनती की, मैं आपकी शरण में हूं। गुरू मिलाप ने माधोदास के जीवन में महान कांति लादी। श्री गुरू गोविन्द सिंग ने उसे अमृतपान करवा कर खालसा पंथ में शामिल किया उनका नाम “बाबा बंदा सिंघ बहादर रखा”

श्री गुरू गोविन्द सिंग जी ने अपने “खालसा” में यह भाव कूट-कूट कर भर दिया कि सत्य के मार्ग पर जो भी कार्य कर रहा है, वह ईश्वरीय कार्य है।

“शाहिशहन शाह गुरू गोविन्द सिंघ जी, बरदो आलमशाह गुरू गोविन्द सिंघ जी।”

श्री गुरू गोविन्द सिंग महराज ऐसे गुरू थे, जिनकी गौरव गाथा आज भी जाने कितनों को प्रेरणा दे रही है।

जी” का। महराजों के महाराज घिराज, दो जहाजों पर राज्य है श्री गुरू गोविन्द सिंघ

वाहिगुरू जी का खालसा वाहिगुरू जी की फतहि”

    मनजीत कौर पसरीजा

vicky Silas

विक्की साइलस – संपादक, छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम विक्की साइलस पिछले 12 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने करीब 10 साल तक छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख सांध्य दैनिक अखबार में पत्रकार के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम के संपादक हैं। वे सरल, तथ्य आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। उनकी नेतृत्व में “छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम” आम लोगों की आवाज़ को प्राथमिकता देने वाला भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। संपर्क: vicky@chhattisgarhprimetime.com