शराबबंदी का ऐलान, न बिकेगी न पीएंगे न पीने देंगे, बेचने वालो को मिलेगी सजा

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मुरैना। चंबल अंचल के ग्रामीण इलाकों में अब अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ और गांव में शराब पीने को लेकर पंचायत में होना शुरू हो गई है। ताजा मामला जनपद पंचायत जौरा के ग्राम पंचायत खांडोली में बुजुर्ग व युवाओं ने गहन मंथन के बाद गांव में पंचायत आयोजित की और तय किया कि अब गांव में कोई अवैध शराब न बनेगा और न बिकने देंगे। बुजुर्गों ने कहा कि अवैध शराब के सेवन से वर्ष 2000 से अभी तक करीब एक सैकड़ा युवकों की असमय मौत हो चुकी है। एक सैकड़ा से अधिक मौतों के बाद अब गांव के लोगों ने खांडोली पंचायत के सभी मजरा टोला ओं के लोगों के साथ पंचायत कर निर्णय लिया गया है कि अब गांव में शराब पूर्ण तरह प्रतिबंध की जाती है।
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गांव के लोगों ने इस पंचायत का आयोजन कोक सिंह पुरा में स्थित हनुमान जी मंदिर पर आयोजित की गई। इसमें गांव के बुजुर्ग व युवा सभी उपस्थित रहे। अभी तक अवैध शराब के कारोबार को लेकर जिले में चर्चित गांव खांडोली में अब अवैध शराब से ग्रामीणों ने तौबा कर लिया है। इस निर्णय में गांव के बुजुर्ग,

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युवाओं के साथ महिलाओं भी सहमति रही है,ग्रामीणों ने पंचायत में कहा कि गांव का कोई व्यक्ति अवैध शराब नहीं बेचेगा और न बिकने देगा। आसपास के कुछ गांव के शराब तस्कर हमारे गांव में अवैध शराब की तस्करी करते थे, उनको भी बोल दिया है कि अगर हमारे गांव में अवैध शराब लेकर आए तो पुलिस व प्रशासन की मदद से सख्त कार्रवाई करेंगे।

बुजुर्गों ने कहा कि अगर गांव का कोई व्यक्ति अवैध शराब बेचता है तो उसके लिए पंचायत में तय करेगी कि उसको क्या सामाजिक दंड दिया जाए, अगर उसके बाद भी नहीं मानता है तो पुलिस की मदद ली जाएगी लेकिन अवैध किसी भी हाल में अवैध शराब नहीं बिकने दी जाएगी,

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खांडोली में सबसे पहले उस दुकान को स्वतह ही बंद कर दिया जिससे अवैध शराब बिकती थी। जो लोग इस कारोबार में लिप्त थे, उन्होंने पंचायत के निर्णय का समर्थन करते हुए सबसे पहले अपनी दुकान बंद की और कहा कि हम गांव के फैसले में उनके साथ हैं।

पुलिस के अधिकारियों की माने तो गांव के लोगों ने बहुत अच्छी पहल की है इसके लिए पुलिस भी ग्रामीणों का पूरी तरह से सहयोग करेगी साथ ही थाना प्रभारी को निर्देश कर दिया है कि गांव में लगातार मॉनिटरिंग करें और अवैध शराब बंदी मैं ग्रामीणों का पूरी तरह से सहयोग किया जाए, गांव के लोगों ने बताया कि शराबबंदी का निर्णय इसलिए लेना पड़ा कि वर्ष 2000 से अभी तक एक सैकड़ा से अधिक युवाओं की अवैध शराब के सेवन से मौत हो चुकी है, किसी मां की कोख उजड़ गई,

किसी बहन का भाई चला गया तो किसी की मांग का सिंदूर उजड़ गया,कई बच्चे बिना पिता के रह गए, हालांकि ग्रामीणों ने पुलिस से सहयोग की बात की है और आसपास के गांव के लोग जो अवैध शराब बेचने के लिए गांव आते हैं उन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का सहयोग भी मांगा है