गांव में विवाद के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज, पुलिस प्रशासन की मदद करने वाले व्यक्ति को बदनाम करने की कोशिश का आरोप


नवीन पैकरा – संवाददाता, कसडोल ग्रामीण कसडोल। ग्राम बगार में हाल ही में हुए लड़ाई-झगड़े के बाद विवाद का मामला सामने आया है। इस बीच नीलेश शर्मा को लेकर भी कई आरोप लगाए जा रहे हैं। संबंधित पक्ष का कहना है कि विवाद के दौरान नीलेश शर्मा मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन बाद में गवाही देने के लिए थाने पहुंचे थे। इस घटनाक्रम को लेकर अब अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
ग्रामीण पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि नीलेश शर्मा के खिलाफ फर्जी नौकरी से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में लगभग 10 वर्षों तक फरार रहने का आरोप रहा है। बताया गया है कि इस मामले में उनकी पूर्व में गिरफ्तारी भी हुई थी। हालांकि, इस मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पुलिस को सूचना देने पर ग्रामीणों को परेशान करने का आरोप

ग्रामीण पक्ष के अनुसार, गांव के एक पंच ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए पुलिस को सूचना दी थी। आरोप है कि जेल से रिहा होने के बाद नीलेश शर्मा गांव के लोगों को परेशान करने लगे। संबंधित पक्ष का यह भी कहना है कि जब भी वह पुलिस प्रशासन का सहयोग करता है, तब उसे बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
सड़क हादसे का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने का दावा
दिए गए विवरण के अनुसार, नीलेश शर्मा के ट्रैक्टर से जुड़े एक हादसे में दो बच्चों की मौत हुई थी। इस मामले में लापरवाही का आरोप लगाया गया है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है। मामले में न्यायालय के अंतिम निर्णय और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

नाबालिग बच्चों से गांजा बिकवाने का भी आरोप
बताया जा रहा है कि, संबंधित पक्ष ने छोटे बच्चों से गांजा बिकवाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीण पक्ष का कहना है कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। पुलिस प्रशासन को सहयोग करने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित पक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की मांग की है।

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