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टेमरी में जिस अवैध प्लॉटिंग पर चला था प्रशासन का ‘बुलडोजर’, सड़क चंद दिनों में फिर बनकर तैयार, CEO के आदेश के बाद भी दोबारा कार्यवाही नही, रायपुर के बड़े सराफा कारोबारी से जुड़े तार

रायपुर। राजधानी रायपुर में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न तो प्रशासन की चेतावनी का डर है और न ही बुलडोजर की कार्रवाई का। मामला माना इलाके के टेमरी का है, जहां प्रशासन की कार्रवाई को ठेंगा दिखाते हुए भू-माफिया ने उसी स्थान पर दोबारा सड़क बना ली है, जिसे राजस्व विभाग ने 7 जनवरी को तोड़ दिया था। अब यहां धड़ल्ले से दोबारा अवैध प्लॉटिंग और रजिस्ट्री की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

बीते 7 जनवरी को राजस्व विभाग के अमले ने टेमरी में हो रही अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर चलाया और अवैध रूप से बनाई गई मुरम रोड को काट दिया था। उस वक्त भविष्य में निर्माण न करने की सख्त चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन प्रशासन की पीठ फिरते ही माफिया फिर सक्रिय हो गए। चेतावनी के कुछ ही दिनों के भीतर वहां दोबारा सड़क तैयार कर ली गई। यह घटना सीधे तौर पर जिला प्रशासन की सख्ती और मॉनिटरिंग सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर रही है।

अवैध निर्माण की जानकारी दोबारा मिलने पर जिला पंचायत सीईओ सौरभ बाजपेयी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि कार्यवाही के बाद भी उक्त स्थान पर फिर सड़क बनाने की सूचना मिली है। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तहसीलदार को दोबारा नोटिस जारी कर तत्काल कार्यवाही के लिए निर्देशित किया है। सबसे अहम बात यह है कि सीईओ ने इस बार भूमि मालिकों पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके, तहसीलदार और राजस्व अमले द्वारा अब तक न तो मौके पर दोबारा मशीनें भेजी गईं और न ही पुलिस में कोई मामला दर्ज कराया गया। अधिकारियों की यह सुस्ती मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।

यह पूरा खेल माना कैंप स्थित शारदा विहार के पास चल रहा है, जो अटल एक्सप्रेस-वे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। यह भी जानकारी मिली है, कि यहां न तो रेरा का पंजीयन है, न टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की स्वीकृति है और न ही जमीन का डायवर्जन कराया गया है। नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनी काटी जा रही है।

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, जिस जमीन पर यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसके एक से ज्यादा खसरे हैं और उन खसरों के मालिक भी अलग-अलग हैं। आशंका जताई जा रही है कि भूमि मालिकों की सहमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध कार्य संभव नहीं है। इस खेल में भूमि मालिकों की भूमिका भी बेहद संदिग्ध है, लेकिन अब तक उन पर आंच नहीं आई है। यह भी जानकारी मिली है इन भूमियों में से एक भूमि रायपुर शहर के प्रतिष्ठित सराफा कारोबारी की है।

यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 6 जनवरी को खबर आती है, 7 को बुलडोजर चलता है, लेकिन किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?, सड़क दोबारा बन गई, तो क्या स्थानीय पटवारी और आरआई को इसकी भनक नहीं लगी? जब प्रोजेक्ट अवैध है, तो इसकी रजिस्ट्री की तैयारी कैसे चल रही है? क्या पंजीयन विभाग भी इसमें शामिल है? फिलहाल, अब देखना होगा कि सीईओ के निर्देश के बाद भू-माफियाओं क्या कार्यवाही होती है या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

vicky Silas

विक्की साइलस – संपादक, छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम विक्की साइलस पिछले 12 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने करीब 10 साल तक छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख सांध्य दैनिक अखबार में पत्रकार के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम के संपादक हैं। वे सरल, तथ्य आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। उनकी नेतृत्व में “छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम” आम लोगों की आवाज़ को प्राथमिकता देने वाला भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। संपर्क: vicky@chhattisgarhprimetime.com

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