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अहिवारा नगर पालिका—विवादों की राजनीति के बीच खोता विकास

दुर्ग। गोवर्धन प्रसाद ताम्रकार : जिला दुर्ग के अहिवारा नगर पालिका में इन दिनों जिस तरह चर्चा में है, वह किसी भी उभरते नगर के लिए शुभ संकेत नहीं है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद का टूटना किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं माना जा सकता, लेकिन अहिवारा में यह स्थिति अब सामान्य होती जा रही है। अध्यक्ष,एवं कुछ पार्षदों और नगर पालिका अधिकारियों के बीच बढ़ रहा तनाव नगर के भविष्य को सीधे प्रभावित कर रहा है।

नगर की जनता ने अपने प्रतिनिधियों को विकास की जिम्मेदारी दी है, परन्तु आज वही जिम्मेदारी अधिकारी के कारण विवादों और आरोप–प्रत्यारोप की भेंट चढ़ती दिख रही है। जब निर्णय लेने वाली संस्था ही मतभेदों से जकड़ जाए, तो विकास योजनाएँ कैसे आगे बढ़ेंगी? अहिवारा में यही कुछ हो रहा है।

विकास से बड़ा बन चुका है विवाद

नगर पालिका की बैठकों में लगातार असहमति, प्रस्तावों का अटक जाना और आरोपों का सिलसिला—ये सब इस बात का संकेत हैं कि यहाँ विकास से अधिक शक्ति-प्रदर्शन पर जोर है। कुछ पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष के साथ अधिकारी मनमानी कर रहे हैं, वहीं अध्यक्ष का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधि राजनीतिक स्वार्थ में काम रोकने की कोशिश कर रहे हैं। जनता दोनों पक्षों की इस खींचतान को समझती भी है और इससे त्रस्त भी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी राजनीति

स्थानीय राजनीति का नगर पालिका में हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं, लेकिन अहिवारा में यह दखल अब विकास कार्यों की गति को थामने लगा है। अधिकारी दबाव और खींचतान के बीच निर्णय लेने से बच रहे हैं। फाइलें इधर से उधर घूम रही हैं और जनता की समस्याएँ ज्यों की त्यों पड़ी हैं।

सड़क–नाली निर्माण, पेयजल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था—ये नगर की बुनियादी आवश्यकताएँ राजनीति की भेंट चढ़ रही हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर का विकास अब ‘कौन कितना शक्तिशाली’ है, इस प्रतियोगिता का माध्यम बनता जा रहा है।

जनता के विश्वास पर चोट

जनता ने अपने प्रतिनिधियों को काम के लिए चुना था, विवाद पैदा करने के लिए नहीं। जब नागरिकों को यह दिखने लगता है कि उनके मुद्दों से अधिक प्राथमिकता व्यक्तिगत मतभेदों को दी जा रही है, तब लोकतांत्रिक विश्वास कमजोर पड़ता है। अहिवारा में यह विश्वास धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा है।

अब भी समाधान संभव है

अहिवारा का विकास रुका नहीं है, बस पीछे धकेला जा रहा है—और यह स्थिति बदली जा सकती है।
जरूरत है—संवाद बहाल करने की,राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की, और जनता के हितों को सर्वोपरि मानने की। और पर्दे के पीछे के राजनीति को नगर के जनता जानती है

नगर का भविष्य किसी एक व्यक्ति के हाथों नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग में छिपा है। जब तक जनप्रतिनिधि और अधिकारी यह नहीं समझेंगे कि विकास किसी दल या गुट का नहीं, बल्कि पूरे नगर का मुद्दा है—तब तक अहिवारा पीछे ही रहेगा। यह मेरा व्यक्तिगत सोच है

अहिवारा के नागरिक बेहतर नगर के हकदार हैं। अब वक्त है कि नगर पालिका के भीतर के मतभेद पीछे छोड़े जाएँ और विकास को वह स्थान दिया जाए, जो हर लोकतांत्रिक संस्था में उसे मिलना चाहिए—सबसे ऊपर।

vicky Silas

विक्की साइलस – संपादक, छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम विक्की साइलस पिछले 12 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने करीब 10 साल तक छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख सांध्य दैनिक अखबार में पत्रकार के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम के संपादक हैं। वे सरल, तथ्य आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। उनकी नेतृत्व में “छत्तीसगढ़ प्राइम टाइम” आम लोगों की आवाज़ को प्राथमिकता देने वाला भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। संपर्क: vicky@chhattisgarhprimetime.com

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