एफआईआर के बाद करणी सेना के अध्यक्ष शेखावत का बड़ा बयान, टीआई, सीएसपी और रायपुर एसपी को निलंबित करने की मांग

रायपुर। राजधानी रायपुर में हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर मामले को लेकर पुलिस और क्षत्रिय करणी सेना के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। कुछ दिन पहले
क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत सोशल मीडिया पर लाइव आकर रायपुर एसएसपी और अन्य पुलिसकर्मियों को उनके घर में घुसने की दी थी। जिसके बाद अब डॉ. राज शेखावत के खिलाफ रायपुर के मौदहापारा थाने में FIR दर्ज की गई है। वहीं प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने दो टूक कहा है कि अपराधी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा निकाले गए जुलूस से शुरू हुआ। करणी सेना अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर एक लाइव वीडियो जारी किया था। आरोप है कि इस वीडियो में उन्होंने वीरेंद्र तोमर पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों और रायपुर एसएसपी को सीधे तौर पर धमकी दी।
इस मामले में पुरानी बस्ती थाने के पूर्व थानेदार और कार्रवाई में शामिल रहे इंस्पेक्टर योगेश कश्यप ने मौदहापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने आपराधिक धमकी देने, लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए धमकाने और सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने शनिवार को डॉ. राज शेखावत के खिलाफ FIR दर्ज की है।
FIR के बाद शेखावत का पलटवार, दी आंदोलन की चेतावनी
अपने खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद डॉ. राज शेखावत ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “FIR से ना मैं डरता हूँ ना ही मेरा क्षत्रिय समाज। न्याय चाहिए मतलब चाहिए। अपनी गलती स्वीकारो एवं यह दबाव की राजनीति बंद करो। बाकी 7 तारीख को दिखाते हैं क्षत्रियों की ताकत आपको।” इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ सकता है।
करणी सेना ने सरकार और प्रशासन के सामने रखीं ये मांगें
करणी सेना ने वीरेंद्र तोमर मामले में पुलिस की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए सरकार और प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि ये मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आक्रामक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
प्रमुख मांगें:
SIT जांच: वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर पर दर्ज मामलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र SIT का गठन किया जाए।
अधिकारियों पर कार्रवाई: टीआई योगेश कश्यप, सीएसपी राजेश देवांगन और रायपुर एसपी लाल उम्मेद सिंह को तत्काल निलंबित कर उन पर FIR दर्ज की जाए। उन पर परिवार से दुर्व्यवहार और एनकाउंटर की धमकी देने का आरोप है।
केस वापस लिए जाएं: तोमर परिवार के खिलाफ दर्ज सभी झूठे प्रकरणों को निरस्त किया जाए।
नुकसान की भरपाई: परिवार को हुए आर्थिक और मानसिक नुकसान के लिए मानहानि का मुकदमा दर्ज कर संबंधित अधिकारियों से इसकी भरपाई की जाए।
सामान की वापसी: जब्त किया गया सारा सामान तत्काल लौटाया जाए
करणी सेना ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कलेक्टर और डीजीपी को संबोधित करते हुए न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने रायपुर की सियासत में हलचल मचा दी है और अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।









