बारनवापारा अभयारण्य :काले हिरण पुनरुद्धार क़ी नई मिसाल



चंदन जायसवाल : बलौदाबाजार। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज संरक्षण की सफलता का एक सशक्त प्रमाण बनकर उभरा है।एक समय ऐसा था जब यहां से काले हिरण विलुप्तप्राय हो गया था लेकिन आज यह अभयारण्य लगभग 200 ब्लैक बक का बसेरा है। यह उपलब्धि धैर्य, वैज्ञानिक देखभाल और गहरी पारिस्थितिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।
रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133 वीं कड़ी में छत्तीसगढ़ के ब्लैक बक संरक्षण प्रयासों का उल्लेख किया और उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ में ब्लैकबक यानी काले हिरणों का फिर से दिखाई देने लगे हैं। एक समय इनकी संख्या बहुत कम हो गई थी लेकिन लगातार प्रयास हुए और संरक्षण बढ़ाया गया। आज ये फिर से खुले मैदान में दौड़ते नजर आते हैं। यह हमारी खोती विरासत क़ी वापसी है।”
1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और आवास विनाश के कारण बारनवापारा से कृष्णमृग लगभग गायब हो गए थे और करीब पाँच दशकों तक स्थानीय रूप से विलुप्त रहे।अप्रैल 2018: राज्य वन्यजीव बोर्ड की 9वीं बैठक में पुनरुद्धार योजना को मंजूरी मिली। योजनाबद्ध तरीके से बारनावापारा अभयारण्य में काले हिरण को वापस लाया गया।अब इनकी संख्या बढ़कर 200 के करीब पहुंच गई है।











