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बारनवापारा अभयारण्य :पानी और आवास प्रबंधन का मिसाल

चंदन जायसवाल : बलौदाबाजार। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में बढ़ते ग्रीष्मकालीन तापमान और प्राकृतिक जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी और जमीनी स्तर पर आधारित पहल की गई है। वन्यजीवों के लिए लगातार पानी उपलब्ध रहे, इसे प्राथमिकता में रखते हुए अभ्यारण्य में एक समन्वित और व्यावहारिक प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें मानचित्रण, निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और आवश्यकता अनुसार प्रयास शामिल हैं।

अभयारण्य क्षेत्र में जल स्रोतों का विस्तृत मानचित्रण किया गया है जिससे पूरे क्षेत्र में पानी की उपलब्धता की स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सके। सम्पूर्ण अभयारण्य में वन्यप्राणियों के जल आपूर्ति हेतु तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और सॉसर सहित लगभग 240 से अधिक जल स्रोतों को चिन्हित कर उनकी निगरानी की जा रही है। प्रत्येक 15 दिनों में इन जल स्रोतों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी उपलब्ध रहे। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन स्थानों की भी पहचान की गई है जहाँ पानी का स्तर कम हो रहा है, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी इस पूरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। स्टाफ गेज के माध्यम से जल स्तर का आकलन कर जल स्रोतों को उनकी स्थिति के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, जिससे प्राथमिकता तय कर प्रभावी जल प्रबंधन किया जा सके। इससे यह संभव हो पाया है कि जल स्रोतों में गिरावट को समय रहते पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

वन्यप्राणीयों के लिए जल की उपलब्धता के साथ-साथ गुणवत्तायुक्त पानी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पी एच और टीडीएस जैसे मानकों का परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पानी वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हो। प्रत्येक जल स्रोतों का जियो-टैगिंग और समय आधारित डेटा संकलन के माध्यम से निगरानी प्रणाली को और अधिक सटीक और जवाबदेह बनाया गया है।जहाँ प्राकृतिक जल स्रोतों में कमी पाई गई, वहाँ टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाकर स्थिति को संतुलित किया गया। लगभग 25-30 ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान कर वहां नियमित रूप से पानी की आपूर्ति की गई, जिससे गर्मी के समय में भी वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

वन्यजीवों के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अभयारण्य में विभिन्न स्थानों पर साल्ट लिक भी बनाए गए हैं। जल स्रोतों के पास इन्हें स्थापित करने से वन्यजीवों को एक ही स्थान पर पानी और आवश्यक मिनरल्स दोनों मिल रहे हैं।

वनमंडलाधिकारी बलौदाबाज़ार धम्मशील गणवीर ने कहा कि अभयारण्य में एक ऐसी प्रणाली विकसित हुई है जो लगातार निगरानी और समय पर आवश्यक उपायों पर काम कर रही है। यह पहल न केवल वर्तमान में वन्यजीवों के लिए राहत प्रदान कर रही है, बल्कि भविष्य में भी जल प्रबंधन के एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आ रही है।

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