बजट 2026- किसान फिर हाशिये पर, सवालों के घेरे में सरकार की प्राथमिकताएं- शैलेश नितिन त्रिवेदी

बलौदाबाजार। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत इस वर्ष का बजट एक बार फिर देश के करोड़ों किसानों के लिए निराशा लेकर आया है। बजट भाषण से लेकर दस्तावेज़ों तक, किसानों के लिए किसी ठोस और नई योजना का अभाव साफ़ दिखाई देता है। जिस वर्ग को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, उसी का नाम तक बजट में प्रमुखता से न आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।किसानों की अनदेखी या नीति का हिस्सा हर वर्ष की तरह इस बार भी किसानों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी आय, लागत, कर्ज़, फसल मूल्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस पहल करेगी। लेकिन बजट में न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी का जिक्र है और न ही खेती की बढ़ती लागत से राहत दिलाने वाली कोई नई योजना सामने आई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसानों की अनदेखी अब एक स्थायी नीति का रूप ले चुकी है?पूंजीवाद को बढ़ावा, किसान को नजरअंदाज ने आलोचकों का कहना है कि मौजूदा बजट में बड़े उद्योगों और कॉर्पोरेट सेक्टर को न राहत देने की सोच स्पष्ट दिखती है, जबकि किसान हितों को प्राथमिकता नहीं दी ने गई। यही कारण है कि इस बजट को जनहित का बजट कहने के बजाय कई लोग 5 इसे पूंजीवादी सोच से प्रेरित बजट करार दे रहे हैं।









