आंजनेय यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय INCON 26: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन



रायपुर। आंजनेय यूनिवर्सिटी द्वारा दो दिवसीय “INCON 26: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन का विषय– “ग्लोबल कन्वर्जेन्स : बिज़नस, टेक्नोलॉजी एंड ह्यूमैनिटीज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट” रखा गया है । सम्मेलन को छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC), छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इट्सा हॉस्पिटल, यूनिवर्सल फाइन केमिकल्स एवं आशीर्वाद ब्लड बैंक सहित विभिन्न संस्थाओं का सहयोग प्राप्त हुआ। यह सम्मेलन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में आयोजित किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य व्यवसाय, प्रौद्योगिकी और मानविकी के क्षेत्रों को एक मंच पर लाकर सतत विकास (Sustainable Development) के लिए नए विचारों, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देगा। सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एन. वी. रामन्ना राव, निदेशक, NIT रायपुर की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई प्रदान की। अपने उद्बोधन में उन्होंने तकनीकी शिक्षा, नवाचार एवं उद्योग–अकादमिक सहयोग की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को शोध-उन्मुख सोच विकसित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सूरज त्रिपाठी, सीइओ इट्सा हॉस्पिटल, रायपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि सम्मेलन की थीम केवल एक विषय नहीं, बल्कि आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सतत विकास तभी संभव है जब व्यवसायिक दक्षता, उन्नत तकनीक और मानवीय संवेदनाएं एक साथ कार्य करें। उन्होंने बताया कि डिजिटल हेल्थ सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डायग्नोस्टिक्स और आधुनिक प्रबंधन तंत्र अस्पतालों को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य सेवाएं संवेदनशील दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ दी जाती हैं, तभी वास्तविक सतत विकास संभव होता है। वहीं मुख्य वक्ता प्रो. पारिन सोमानी, फाउंडर एंड सीइओ लन्दन आर्गेनाईजेशन ऑफ स्किल डेवलपमेंट, यूनाइटेड किंगडम ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी में सतत विकास का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि कौशल संपन्न मानव संसाधन और समावेशी अवसर हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास व्यवसायिक उन्नति को गति देता है, तकनीक उसे वैश्विक मंच प्रदान करती है और मानविकी उसे नैतिक दिशा देती है। उन्होंने वैश्विक नेटवर्किंग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान-साझेदारी को नवाचार की शक्ति बताते हुए कहा कि सीमाओं से परे साझेदारी ही भविष्य का मार्ग है। उनके विचारों ने सम्मेलन की थीम को सार्थकता प्रदान करते हुए शोध, नवाचार और वैश्विक सहभागिता की दिशा में नई प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अभिषेक अग्रवाल ने की। इस अवसर पर प्रो-चांसलर श्रीमती दिव्या अग्रवाल, डायरेक्टर जनरल डॉ. बी. सी. जैन, कुलपति डॉ. टी. रामाराव, निदेशक डॉ. जयेंद्र नारंग, निदेशक (अकादमिक) डॉ. संध्या वर्मा, निदेशक फिल्म श्री भगवान तिवारी, रजिस्ट्रार डॉ. रुपाली चौधरी सहित विश्वविद्यालय के सभी डीन, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सम्मेलन में देश-विदेश से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 500 से अधिक पंजीकरण के साथ यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि साबित हुआ। विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण के साथ समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु विचार-विमर्श किया गया।
विश्वविद्यालय के सभी संकायों में तकनीकी सत्रों का आयोजन*
सम्मेलन के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सभी संकायों में विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्रों का सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। इन सत्रों में प्रबंधन, अभियांत्रिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, मानविकी, विधि, शिक्षा तथा स्वास्थ्य विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर देश-विदेश से 250 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जो सम्मेलन की शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक सहभागिता को दर्शाते हैं। प्रत्येक शोध पत्र का मूल्यांकन विषय-विशेषज्ञों एवं तकनीकी समिति द्वारा किया गया, जिसके पश्चात चयनित शोधार्थियों को प्रस्तुतीकरण का अवसर प्रदान किया गया। सत्रों के दौरान शोध, नवाचार, सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इन तकनीकी सत्रों ने ज्ञान-विनिमय, अकादमिक संवाद और बहु-विषयक सहयोग को सशक्त मंच प्रदान किया।
सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान
उद्योग उत्कृष्टता सम्मान से श्री मनु नाहर को उद्योग क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व, नवाचार एवं व्यावसायिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। अग्रणी वैज्ञानिक सम्मान से डॉ. गुलाब चंद आर्य, रामालिंगा फेलो, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, KIIT University तथा डॉ. दिप्ती चंद्राकर, सहायक प्राध्यापक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आंजनेय यूनिवर्सिटी को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार एवं समाजोपयोगी शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। शैक्षणिक उत्कृष्टता सम्मान से डॉ. माधवी तिवारी, सहायक प्राध्यापक, अनुप्रयुक्त विज्ञान विभाग, श्री रावतपुरा यूनिवर्सिटी, डॉ. सचिन कुमार दास, विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, आंजनेय विश्वविद्यालय तथा श्री दाऊ लाल सेन, सहायक प्राध्यापक, प्राणीशास्त्र विभाग, आंजनेय विश्वविद्यालय को शिक्षण, शोध मार्गदर्शन एवं संस्थागत विकास में विशिष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया गया।









