सयुंक्त मसीह समाज छत्तीसगढ़ ने धर्मान्तरण कानून के विरोध में हजारों हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा



रायपुर। संयुक्त मसीह समाज छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश में लागू/प्रस्तावित धर्म विधेयक (जिसे समाज द्वारा “काला क़ानून” कहा जा रहा है) के विरोध में एक बड़ा लोकतांत्रिक कदम उठाया जा गया है। समाज के प्रतिनिधियों द्वारा हजारों नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र के साथ राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।
संयुक्त मसीह समाज के पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रभाकर सोनी ने बताया कि इस हस्ताक्षर अभियान में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया है और इस कानून के प्रति अपनी असहमति दर्ज कराई है। समाज का कहना है कि यह कानून भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
समाज के अनुसार, यह विधेयक विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार) के विपरीत प्रतीत होता है। इसके कारण एक विशेष समुदाय को लक्षित किए जाने की आशंका है, जिससे समाज में असमानता और भेदभाव का वातावरण बन रहा है।
संयुक्त मसीह समाज छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है, और किसी भी प्रकार का कानून यदि इन अधिकारों को सीमित करता है, तो उसका विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि वे शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं और इसी क्रम में हजारों हस्ताक्षरों के साथ महामहिम को ज्ञापन सौंपकर इस कानून को निरस्त करने की मांग करेंगे।
संयुक्त मसीह समाज ने प्रशासन से अपील की है कि सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और इस विधेयक की निष्पक्ष एवं संवैधानिक समीक्षा की जाए।
समाज ने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी आह्वान किया है कि वे संविधान की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एकजुट रहें।











