“भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की सांठगांठ से लोकतंत्र की हत्या”: डॉ. शिवकुमार डहरिया





रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने राज्य में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 25 लाख नागरिकों के नाम हटाए जाने को केंद्र की भाजपा सरकार और भारत निर्वाचन आयोग का एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर देश से लोकतंत्र और नागरिकों का मताधिकार छीनने का काम कर रहे हैं।
डॉ. शिवकुमार डहरिया ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जब वोट देने का अधिकार ही छीना जा रहा है, तो देश में लोकतंत्र कहाँ बचा है..? केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर निर्वाचन आयोग अपनी निष्पक्षता को ताक पर रखकर काम कर रहा है।”
‘हार-जीत के अंतर से 4 गुना अधिक वोटरों का नाम काटना सीधी साज़िश’

डॉ. डहरिया ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि छत्तीसगढ़ में SIR के नाम पर 24,99,823 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोटों का अंतर मात्र 6,32,382 (4.04%) था। ऐसे में चुनाव परिणाम के अंतर से लगभग 4 गुना अधिक मतदाताओं के नाम काटना सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और जनता के जनादेश को बदलने की साजिश की ओर इशारा करता है।
बिना सुनवाई 19 लाख से अधिक नागरिकों का अधिकार छीना
पूर्व मंत्री ने बताया कि हटाए गए कुल नामों में से 19,13,540 मतदाताओं को मनमाने ढंग से ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ श्रेणी में डालकर विलोपित कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी ठोस भौतिक सत्यापन और बिना सुनवाई का मौका दिए इतने बड़े पैमाने पर आम जनता का नाम काटना किस कानून के तहत सही है.? यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
इस पूरे मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ शिवकुमार डहरिया की मांग है कि-
चुनाव आयोग साबित करे निष्पक्षता: भारत निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार का टूल बनने के बजाय अपनी संवैधानिक निष्पक्षता साबित करे और हटाए गए सभी 24.99 लाख नामों की पारदर्शी व व्यक्तिगत समीक्षा करे।
समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक हो: किस आधार पर और किसकी रिपोर्ट पर 19 लाख से अधिक लोगों को ‘शिफ्टेड/एब्सेंट’ बताकर उनका नाम काटा गया, उसकी सूची सार्वजनिक की जाए।
नाम तुरंत बहाल किए जाएं: जिन वैध नागरिकों के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से काटे गए हैं, उन्हें तत्काल मतदाता सूची में पुन: जोड़ा जाए।
डॉ. डहरिया ने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग की इस तानाशाही के खिलाफ कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। जनता के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ेगी।











