आयोग की समझाईश पर अनावेदक देगा आवेदिका को 1500 रू. प्रतिमाह भरण-पोषण




रायपुर/10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्यगण श्रीमती सरला कोसरिया, श्रीमती ओजस्वी मंडावी व सुश्री दीपिका शोरी ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर 32 प्रकरणों को सुनवाई हेतु रखा गया, जिसमें से 13 प्रकरणों की सुनवाई की गई व 06 प्रकरण नस्तीबध्द किये गये। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज प्रथम एवं रायपुर जिले में प्रथम जनसुनवाई की गई।
आज के एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों द्वारा आवेदिका को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर पंचायत में प्रवेश से अवैध रूप से रोक लगाकर सामाज से बहिष्कृत कर दिया गया है। आवेदिका को विस्तार से सुना गया अनावेदकगणों ने अपना पक्ष रखने के लिए एक समय की मांग की। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु रखा गया।
एक अन्य प्रकरण में एस.आई.सी. हॉस्पिटल की 13 नर्सों ने महिला आयोग मे अलग-अलग कुल 13 प्रकरण दर्ज कराया है। जिसमें आवेदिकागणों ने बताया कि उनका अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी के माध्यम से ई.एस.आई.सी. हॉस्पिटल, रायपुर के माध्यम से नर्सिंग ऑफिसर के रूप में दो वर्ष पूर्व नियुक्ति हुई थी, जिनका वेतन 40 हजार से 48 हजार रू. तक है। परंतु उन्हें वेतन का आधा पैसा ही प्राप्त होता है और इसमें अनुग्रह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक ऐजेंसी, ई.एस.आई. सी. हॉस्पिटल एवं यूको बैंक डी.डी. नगर की संलिप्तता से हमारे साथ धोखाधड़ी हो रहा है। आवेदिकाओं ने बताया कि एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और सुपरवाईजर द्वारा उनका पासबुक, चेकबुक ओर एटीएम अपने पास रखा गया है और जब भी वेतन आता है तो एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा उनका आधा वेतन निकाल लिया जाता है। अनावेदकगण लगातार आयोग की सुनवाई में अनुपस्थित है अतः आवेदिकागणों को अनावेदकगणों के विरूध्द एफ.आई.आर. दर्ज कराने के निर्देश दिये गये एफ.आई.आर दर्ज कराने में महिला आयोग द्वारा आवेदिकागणों की मदद की जावेगी।
एक प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक अनावेदक (पति) के विरूध्द आवेदिका से तलाक लेकर दूसरी शादी कर लिये जाने और आवेदिका व उसके बच्चों को कोई भरण-पोषण ना दिये जाने की शिकायत आयोग मे दर्ज कराई थी, आवेदिका की शिकायत को विस्तार से सुना गया। आवेदिका ने बताया कि उभय पक्ष का 1 वर्ष का पुत्र है जो बिमार रहता है इलाज का खर्च बहुत अधिक है। आयोग द्वारा उभय पक्षों को समझाईश दिया गया जिस पर अनावेदक आवेदिका को प्रतिमाह 1500 रू. भरण-पोषण की राशि देने के लिए तैयार हुआ।
एक अन्य प्रकरण में भी आवेदिका ने अनावेदक (पति) के विरूध्द आवेदिका और उसके बच्चों का भरण-पोषण ना किये जाने से संबंधित शिकायत की थी। दोनो पक्षों को विस्तार से सुना गया आवेदिका अनावेदक से तलाक लेना चाहती है व एक मुश्त भरण-पोषण राशि चाहती है। आयोग द्वारा आवेदिका को न्यायालय जाने की समझाईश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के विरूध्द शारीरिक शोषण कर मारपीट किये जाने व आपत्तिजनक फोटो व वीडियो लिये जाने से संबंधित शिकायत की थी। आवेदिका ने बताया की उसका प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। आवेदिका को भरण-पोषण व परिवार न्यायालय में धारा 09 दाम्पत्य जीवन की पुर्नस्थापना का प्रकरण दर्ज करने के निर्देश के साथ व प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने की स्थिति में आयोग से प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।









