भीषण गर्मी में आँखों पर बढ़ता खतरा, सावधानी और समय पर जांच बेहद जरूरी : डॉ. अभिषेक मेहरा




रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते तापमान, तेज धूप और बदलते पर्यावरणीय हालात का सीधा असर अब लोगों की आँखों के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। गर्मियों के मौसम में ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस, आँखों में जलन व लालिमा तथा अस्थायी धुंधलापन जैसी समस्याओं के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहरा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी, तेज अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें, धूल-प्रदूषण और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता उपयोग आँखों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कारणों से आँखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित होती है और धीरे-धीरे कई जटिल समस्याएं विकसित होने लगती हैं।
डॉ. मेहरा के अनुसार गर्मी के कारण होने वाला डिहाइड्रेशन आँखों की नमी को कम कर देता है, जिससे सूखापन, जलन, किरकिरापन और भारीपन महसूस होता है। लंबे समय तक एयर कंडीशनर या कूलर में रहने से यह समस्या और बढ़ जाती है। वहीं, तेज धूप में मौजूद UV किरणें कॉर्निया को नुकसान पहुंचाकर फोटोकेराटाइटिस (आँखों का सनबर्न) जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं। धूल और पराग कणों की अधिकता से एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के मामले, खासकर बच्चों और संवेदनशील व्यक्तियों में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का लगातार उपयोग पलक झपकने की दर को कम कर देता है, जिससे आँखें और अधिक सूखने लगती हैं और डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या बढ़ती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। समय पर ध्यान न देने पर यह क्रॉनिक ड्राई आई, संक्रमण या दृष्टि से जुड़ी जटिलताओं का रूप ले सकता है।
बचाव के उपायों पर जोर देते हुए डॉ. मेहरा ने कहा कि गर्मी के मौसम में आँखों की देखभाल के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी आदतें अपनाना जरूरी है। बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले UV प्रोटेक्शन सनग्लासेस का उपयोग करें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, जिससे आँखों की नमी बनी रहे।
उन्होंने सलाह दी कि स्क्रीन टाइम को सीमित करें और 20-20-20 नियम अपनाएं हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। साथ ही, एयर कंडीशनर या कूलर की हवा सीधे आँखों पर न पड़े, इसका ध्यान रखें। बिना नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी प्रकार के आई ड्रॉप का उपयोग न करें। आँखों को समय-समय पर ठंडे पानी से धोना या हल्की ठंडी सिकाई करना भी लाभकारी होता है।
डॉ. मेहरा ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से आँखों की समस्या से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी।
छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल पिछले 45+ वर्षों से प्रदेशवासियों को विश्वसनीय और किफायती नेत्र उपचार सेवाएं प्रदान कर रहा है, जहाँ आधुनिक तकनीक के साथ अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है।
अस्पताल की ओर से सभी नागरिकों से अपील की गई है कि इस भीषण गर्मी के मौसम में आँखों की देखभाल को प्राथमिकता दें और नियमित अंतराल पर नेत्र परीक्षण अवश्य कराएं। मौसम कोई भी हो, आँखों की सुरक्षा को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।











