आरएचओ स्थानांतरण आदेश के तीन माह बाद भी नहीं हुआ पालन, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल



चंदन जायसवाल
कसडोल। शहीद संतराम साहू स्मृति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसडोल के अंतर्गत कार्यरत ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों (आरएचओ) के स्थानांतरण आदेश के पालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, कार्यालय खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा 27 मार्च 2026 को जारी आदेश में 19 आरएचओ को उनके वर्तमान पदस्थापना स्थल से मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आदेश जारी होने के लगभग तीन माह बाद भी कई कर्मचारियों द्वारा इसका पालन नहीं किए जाने का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर आमाखोवा में पदस्थ आरएचओ ऋषिकेश साहू का स्थानांतरण आयुष्मान आरोग्य मंदिर बार किया गया था, जबकि आयुष्मान आरोग्य मंदिर बिलारी में पदस्थ आरएचओ सुखदेव प्रसाद डडसेना को थरगांव भेजे जाने का आदेश जारी हुआ था। आरोप है कि दोनों कर्मचारी अब तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर रहे हैं।
जांच के दौरान कर्मचारी अनुपस्थित मिले
मामले की पड़ताल के दौरान पत्रकारों द्वारा आयुष्मान आरोग्य मंदिर आमाखोवा एवं बिलारी का निरीक्षण किया गया। इस दौरान आरएचओ ऋषिकेश साहू, सुखदेव प्रसाद डडसेना तथा कुमारी सुनील पैकरा अपने-अपने कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं मिले। बताया गया कि फोन पर संपर्क करने पर एक कर्मचारी ने स्थानांतरण स्थल पर नहीं जाने की बात कही।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों पर है, यदि वे नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहेंगे या विभागीय आदेशों का पालन नहीं करेंगे तो इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ेगा।
बीएमओ से पक्ष जानने का प्रयास
मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. वंदना भेले से संपर्क करने का प्रयास किया गया। फोन पर उन्होंने कार्यालय में आकर मिलने की बात कही। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में उनका विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था।
कार्रवाई की प्रतीक्षा
अब देखना होगा कि विभागीय आदेशों की अवहेलना एवं कथित अनुपस्थिति के आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजरें जिला स्वास्थ्य प्रशासन पर टिकी हुई हैं कि मामले में जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।










