रायपुर की गोयल सेल्स पर करोड़ों की जीएसटी चोरी का आरोप, चार साल के वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग

रायपुर। राजधानी रायपुर में स्थित व्यावसायिक फर्म ‘गोयल सेल्स’ के वित्तीय लेन-देन को लेकर जीएसटी में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी और सूत्रों के दावों के अनुसार, फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड में संभावित विसंगतियों की जांच की आवश्यकता जताई जा रही है। आरोप है कि कथित तौर पर बिक्री और वास्तविक टर्नओवर से संबंधित आंकड़ों में अंतर के कारण शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

चार वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड पर उठे सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर के देवपुरी क्षेत्र में संचालित गोयल सेल्स (जीएसटीआईएन: 22AADPF2412Q1Z0) प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण एवं विक्रय के कारोबार से जुड़ी फर्म है। फर्म के वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक के वित्तीय लेन-देन और कर संबंधी रिकॉर्ड की जांच की मांग की जा रही है।

सूत्रों के दावों के मुताबिक, फर्म के वास्तविक कारोबार, बिक्री के आंकड़ों और कर भुगतान के बीच संभावित विसंगतियों की आशंका जताई गई है। यदि इन दावों में तथ्य सामने आते हैं, तो मामला जीएसटी अनुपालन और सरकारी राजस्व से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। हालांकि, किसी भी प्रकार की कर चोरी की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

बिलिंग, स्टॉक और आईटीसी की जांच पर जोर

मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए फर्म के पिछले चार वर्षों के बिक्री बिल, खरीद संबंधी दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी रिटर्न और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विवरण का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि संबंधित विभाग इन अभिलेखों की विस्तृत जांच करते हैं, तो वास्तविक कारोबार, घोषित टर्नओवर और जमा किए गए कर के बीच किसी संभावित अंतर का पता लगाया जा सकता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कर संबंधी नियमों का पालन किया गया है या किसी प्रकार की अनियमितता हुई है।

फर्म संचालक से जानकारी लेने का प्रयास

बताया गया है कि मामले को लेकर फर्म के संचालक विकास अग्रवाल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया और खबर प्रकाशित नहीं करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में फर्म संचालक का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

राज्य और केंद्रीय जीएसटी विभाग से जांच की मांग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामले को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, राज्य एवं केंद्रीय जीएसटी विभाग, रायपुर कलेक्टर और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।

Advertisement

Related Articles