सावन उत्सव का भव्य समापन: 400 महिलाओं के हुनर और उत्साह से सजा मंच

बिलासपुर। सावन की फुहारों, रंगों और उमंग को महिलाओं की प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्साह के साथ जोड़ने वाला सावन उत्सव लगातार दूसरे वर्ष भी अपनी भव्यता और सफलता के साथ संपन्न हुआ। महिलाओं की रचनात्मकता को मंच देने और उन्हें अपनी प्रतिभा के साथ खुलकर सामने आने का अवसर प्रदान करने की सोच के साथ आयोजित इस उत्सव के अंतिम दिन भी प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बना। मंच पर एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया और दर्शकों ने तालियों के साथ प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

एडप्रयास की डायरेक्टर श्रीमती ममता पांडेय की परिकल्पना और नेतृत्व में आयोजित इस सावन उत्सव में इस वर्ष लगभग 400 महिलाओं ने सहभागिता की। करीब 5 महिला समूहों ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में हिस्सा लिया और प्रत्येक समूह में कम से कम 30 महिलाएं शामिल रहीं। अलग-अलग समूहों की महिलाओं ने पूरे आयोजन के दौरान एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हुए प्रतियोगिता को एक स्वस्थ, जीवंत और आनंदपूर्ण माहौल दिया।

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम या प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के लिए प्रतिभा, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और आपसी जुड़ाव का एक साझा मंच बनकर सामने आया।

तीन श्रेणी, सैकड़ों प्रतिभाएं और एक साझा उत्साह

पूरे सावन उत्सव के दौरान महिलाओं को तीन प्रमुख श्रेणियों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला- डांस, सिंगिंग एवं पोएट्री और रैंप वॉक।

नृत्य श्रेणी में प्रतिभागियों ने विभिन्न गीतों और प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी ऊर्जा और कला का प्रदर्शन किया। गायन एवं काव्य की श्रेणी में सुरों और शब्दों के माध्यम से महिलाओं ने अपनी रचनात्मकता दिखाई, वहीं रैंप वॉक में उनका आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और प्रस्तुति का अंदाज आकर्षण का केंद्र रहा।

आयोजन के फाइनल में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और हाई-एनर्जी परफॉर्मेंस का खास रंग देखने को मिला। रूबी जी ने समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव द्वारा विषपान किए जाने की कथा पर आधारित प्रस्तुति दी। दमक दामिनी ने भी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों की तालियां बटोरीं। कौशल्या एंड ग्रुप ने सुआ नृत्य प्रस्तुत कर मंच पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की और पूरे स्टेज में ऊर्जा भर दी। वहीं स्वर्णिमा क्वींस से रजनी ने शिव तांडव की दमदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया।

मेघा और करिश्मा ने “शंकर बोले पार्वती से…” पर प्रस्तुति दी, जबकि पिंकी और शिवांगी ने “खम्मा खड़ी, खम्मा खड़ी…” पर अपनी प्रस्तुति से स्टेज की एनर्जी को और बढ़ा दिया। प्राजक्ता ने “आज मैं ऊपर, जमाना है नीचे…” गीत गाया, वहीं अनुभूति ने “तुमको देखा तो ये खयाल आया…” की प्रस्तुति दी। हेमा ने “सावन मजा ना देगा…” पर प्रस्तुति देकर माहौल में सावन की उमंग घोल दी, जबकि गीता और ज्योत्सना ने “राधिका के डैडी जरा आना…” पर अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया।

प्रणिता, श्रुति और रश्मि ने रीमिक्स गाने पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। रवीना दुबे ने रीमिक्स सॉन्ग पर धमाकेदार परफॉर्मेंस देकर मंच पर जोश भर दिया। इसके बाद संगीता ने “जय जय शंकर भोला, मैं जपत…” की प्रस्तुति दी। प्रीति और शुभांगी गुप्ता ने “इतनी शक्ति हमें देना दाता…” प्रस्तुत कर सकारात्मक संदेश दिया, वहीं प्रियवदा ने रीमिक्स पर अपनी एनर्जेटिक प्रस्तुति से दर्शकों को खूब प्रभावित किया।

श्रुति थवाइत और आशा तिवारी ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में रंग भरा। आशा तिवारी ने “मां दुर्गा मां…” की प्रस्तुति दी, जबकि सुनीता और ग्रुप ने “बाबा शंभू मेरे…” पर प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। बिज्जू और हेमा ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। टूक टूक ने “ना रे ना रे मेघा रे मेघा…” पर प्रस्तुति दी, वहीं प्रीति शर्मा ने रीमिक्स “आयो रे आयो रे…” पर अपनी प्रस्तुति से मंच पर उत्साह बढ़ाया।

आकांक्षा ने “मोर बंशी बजैया…” पर प्रस्तुति दी, जबकि वर्षा और ग्रुप ने बेहद प्रेरणादायक प्रस्तुति देकर सभी का उत्साह बढ़ाया। ममता कर ने “कजरा मोहब्बत वाला…” गीत पर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में मनोरंजन का रंग और गहरा कर दिया। अलग-अलग गीतों, नृत्य शैलियों, भक्ति और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों के इस सिलसिले ने सावन उत्सव के फाइनल को यादगार बना दिया।

आयोजन की विशेषता यह रही कि यहां मंच पर केवल अनुभवी या प्रशिक्षित प्रतिभागियों को ही महत्व नहीं दिया गया, बल्कि हर महिला को अपनी प्रतिभा के साथ सामने आने का अवसर मिला। कई प्रतिभागियों के लिए यह सार्वजनिक मंच पर अपनी कला और व्यक्तित्व को प्रस्तुत करने का विशेष अनुभव रहा।

प्रतियोगिता से ज्यादा रहा उत्सव का आनंद

सावन उत्सव की सबसे खास बात इसका उत्सवधर्मी माहौल रहा। मंच पर प्रतिस्पर्धा जरूर थी, लेकिन पूरे आयोजन में आपसी सहयोग, उत्साह और आनंद का भाव दिखाई दिया।

महिलाएं अपनी प्रस्तुतियों के साथ-साथ अन्य प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाती नजर आईं। किसी की नृत्य प्रस्तुति पर तालियां बजीं तो किसी के गायन और काव्य पाठ ने सभी का ध्यान खींचा। रैंप वॉक में प्रतिभागियों के आत्मविश्वास ने आयोजन में एक अलग ऊर्जा भर दी।

यही वजह रही कि पूरे आयोजन में प्रतियोगिता के साथ सहभागिता और मनोरंजन का संतुलन बना रहा और महिलाओं ने हर गतिविधि का भरपूर आनंद लिया।

विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभाओं को मिला सम्मान

सावन उत्सव के समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिता श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

सोलो डांस में प्रथम पुरस्कार रजनी और द्वितीय पुरस्कार आकांक्षा को दिया गया। दोनों ही प्रतियोगी स्वर्णिमा ग्रुप से थीं।

ग्रुप डांस में प्रथम पुरस्कार रिमझिम ग्रुप को, जबकि द्वितीय पुरस्कार पिंकी और शिवांगी को दिया गया।

गायन श्रेणी में प्रथम पुरस्कार श्रुति थवाईत (लाफिंग ग्रुप) और द्वितीय पुरस्कार रूबी सिन्हा (रिमझिम ग्रुप) को दिया गया।

वहीं रैंप वॉक में प्रथम पुरस्कार अंशु (लाफिंग ग्रुप) और द्वितीय पुरस्कार वर्षा (रिमझिम ग्रुप) को दिया गया।

पूरे आयोजन के प्रदर्शन, सहभागिता और विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्टता के आधार पर अंतिम विजेता का खिताब स्वर्णिमा ग्रुप को दिया गया। विजेता समूह की महिलाओं की खुशी देखते ही बनी और उन्होंने उत्साह के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

विजेता समूह को 50 हजार का पुरस्कार

सावन उत्सव के समापन अवसर पर विजेता समूह के नाम की घोषणा होते ही कार्यक्रम स्थल खुशी और उत्साह से गूंज उठा। विजेता समूह को 50,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

पुरस्कार राशि प्राप्त करने के बाद विजेता समूह की महिलाओं की खुशी देखते ही बनी। यह पुरस्कार उनके लिए केवल जीत की राशि नहीं, बल्कि पूरे आयोजन के दौरान किए गए प्रयास, तैयारी और सहभागिता के सम्मान का प्रतीक रहा।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया और महिलाओं ने उत्साह के साथ इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

विशेषज्ञों की जूरी ने परखा प्रतिभाओं का हुनर

कार्यक्रम में प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी विशिष्ट हस्तियों को निर्णायक मंडल में शामिल किया गया।

डायटिशियन कविता पुजारा, समाजसेवी विद्या गोवर्धन और सत्यभामा अवस्थी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। वहीं आर्ट ऑफ़ लिविंग की रूपा सिंह मुख्य अतिथि एवं रजनी गुप्ता, रूपाली गुप्ता, रीना गुप्ता सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

जूरी ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और मंच पर प्रदर्शन जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिभाओं का मूल्यांकन किया।

ममता पांडेय की परिकल्पना ने दिया उत्सव को खास स्वरूप

सावन उत्सव की पूरी परिकल्पना एडप्रयास की डायरेक्टर श्रीमती ममता पांडेय द्वारा की गई। महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह आयोजन उनकी उस सोच को दर्शाता है, जिसमें महिलाओं को केवल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि कार्यक्रम की मुख्य शक्ति बनाया जाता है।

ममता पांडेय लंबे समय से महिला सहभागिता, सामाजिक सरोकारों और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। सावन उत्सव भी इसी सोच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उनका प्रयास रहा है कि महिलाओं को ऐसा मंच मिले, जहां वे अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से कुछ समय निकालकर अपने लिए जिएं, अपनी प्रतिभा को पहचानें और पूरे आत्मविश्वास के साथ उसे दूसरों के सामने प्रस्तुत करें।

सावन उत्सव के माध्यम से उन्होंने अलग-अलग महिला समूहों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि की महिलाओं का एक साथ आना और पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेना इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा।

महिलाओं के लिए मनोरंजन से आगे बढ़कर एक सकारात्मक पहल

आज के समय में महिलाओं की भागीदारी को केवल औपचारिक मंचों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपनी पहचान, प्रतिभा और आत्मविश्वास के साथ सार्वजनिक मंच देने की जरूरत है। सावन उत्सव इसी आवश्यकता को एक उत्सव के रूप में सामने लाता है।

यह आयोजन महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ नई महिलाओं से मिलने, नए समूहों से जुड़ने और सामूहिक रूप से एक सकारात्मक माहौल का हिस्सा बनने का अवसर देता है।

लगातार दूसरे वर्ष लगभग 400 महिलाओं की सहभागिता इस बात का संकेत है कि महिलाओं के बीच ऐसे मंचों की स्वीकार्यता और उत्साह लगातार बढ़ रहा है।

सावन की परंपरा और आधुनिक महिला का आत्मविश्वास—एक मंच पर

सावन उत्सव की खूबसूरती इस बात में रही कि इसमें सावन की सांस्कृतिक भावना और आज की आत्मविश्वासी महिला एक साथ दिखाई दी।

परंपरागत उत्सव की उमंग के साथ महिलाओं ने आधुनिक मंच पर अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व को प्रस्तुत किया। कहीं नृत्य ने रंग भरे, कहीं गीत और कविता ने भावनाओं को स्वर दिया और कहीं रैंप वॉक ने आत्मविश्वास की झलक दिखाई।

इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि उत्सव केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं होते, बल्कि वे लोगों को जोड़ने, प्रतिभाओं को सामने लाने और समाज में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने का माध्यम भी बन सकते हैं।

एडप्रयास की सामाजिक सोच को मिला एक और विस्तार

एडप्रयास की डायरेक्टर ममता पांडेय द्वारा परिकल्पित सावन उत्सव उनकी व्यावसायिक पहचान से आगे बढ़कर उनके सामाजिक सरोकारों को भी सामने लाता है। उनके लिए महिलाओं को मंच देना केवल एक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की सक्रिय और आत्मविश्वासी भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

मौली धागे से राखी बनाने और उसे सामाजिक सेवा से जोड़ने की उनकी पहल हो, पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा कार्य हो या महिलाओं को एक मंच पर लाने वाला सावन उत्सव—इन प्रयासों में एक साझा सोच दिखाई देती है कि सामाजिक बदलाव बड़े अभियानों से ही नहीं, बल्कि लोगों को साथ जोड़ने वाली छोटी-छोटी सार्थक पहलों से भी आता है।

दूसरे वर्ष की सफलता ने बढ़ाई उम्मीद

लगातार दूसरे वर्ष सफलतापूर्वक आयोजित सावन उत्सव का भव्य समापन आने वाले वर्षों के लिए भी नई उम्मीदें लेकर आया। लगभग 400 महिलाओं की भागीदारी, पांच महिला समूहों का उत्साह, तीन अलग-अलग प्रतियोगिता श्रेणियों में प्रतिभाओं का प्रदर्शन और विजेता समूह को 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि—इन सभी ने आयोजन को खास बनाया।

समापन अवसर पर महिलाओं की खुशी, उत्साह और सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि सावन उत्सव अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच अपनी एक पहचान बनाने वाली पहल के रूप में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस डिपार्टमेंट द्वारा साइबर अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाया गया। इस दौरान डीएसपी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे और महिलाओं को साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

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