PCOD: Gen Z की लड़कियों के लिए एक ‘वेक-अप कॉल

अनियमित पीरियड्स को हल्के में न लें, यह भविष्य की सेहत का संकेत भी हो सकता है ।

डॉ. शालिनी जैन अग्रवाल
M.S. (स्त्री एवं प्रसूति रोग), FICOG, FMAS, CIMP
आज की Gen Z तकनीक में सबसे आगे है। मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन पढ़ाई, देर रात तक जागना और फास्ट फूड अब उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इसी बदलती जीवनशैली के साथ एक ऐसी समस्या भी तेजी से बढ़ रही है, जो चुपचाप लाखों युवतियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। इसका नाम है PCOD (Polycystic Ovarian Disease)।

दुर्भाग्य की बात यह है कि अधिकांश लड़कियां इसे केवल “पीरियड्स की गड़बड़ी” समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि सच यह है कि PCOD केवल ओवरी की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करने वाली स्थिति है।

आज भारत में किशोरियों और युवा महिलाओं में PCOD के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी बदलती जीवनशैली है। घंटों स्क्रीन के सामने बैठना, शारीरिक गतिविधि की कमी, जंक फूड, मीठे पेय, तनाव और पर्याप्त नींद न लेना, ये सभी मिलकर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देते हैं।

PCOD होने पर सबसे पहले पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। कई बार दो-दो या तीन-तीन महीने तक मासिक धर्म नहीं आता। चेहरे पर मुंहासे बढ़ जाते हैं, ठोड़ी या ऊपरी होंठ पर अनचाहे बाल आने लगते हैं, सिर के बाल पतले होने लगते हैं और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। कई लड़कियों में वजन सामान्य रहने के बावजूद भी PCOD पाया जाता है, इसलिए केवल मोटापा इसका कारण नहीं है।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि PCOD का संबंध केवल प्रजनन क्षमता से नहीं है। यदि समय रहते इसका उपचार और नियंत्रण नहीं किया जाए तो आगे चलकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर, हृदय रोग और गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। चिंता, तनाव और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं PCOD से जुड़ी देखी जाती हैं।

आज सोशल मीडिया पर PCOD के इलाज के नाम पर अनेक भ्रामक दावे किए जा रहे हैं। कोई सात दिन में इलाज का दावा करता है, तो कोई किसी विशेष डाइट या डिटॉक्स ड्रिंक को चमत्कारी बताता है। वास्तविकता यह है कि आज तक ऐसा कोई एक इलाज उपलब्ध नहीं है जो PCOD को हमेशा के लिए समाप्त कर दे।

वैज्ञानिक शोध स्पष्ट बताते हैं कि जीवनशैली में सुधार ही PCOD के उपचार की सबसे मजबूत नींव है। नियमित व्यायाम, संतुलित एवं प्रोटीन युक्त भोजन, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और वजन का संतुलन—ये पांच उपाय कई बार दवाओं से भी अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। आवश्यकता होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ मरीज की समस्या के अनुसार दवाइयां भी देते हैं, लेकिन हर मरीज की दवा अलग हो सकती है।

हाल के वर्षों में वजन कम करने वाले इंजेक्शन और नई दवाओं की काफी चर्चा हुई है। ये कुछ चुनिंदा मरीजों में लाभदायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कभी भी जीवनशैली सुधार का विकल्प नहीं माना जा सकता। बिना चिकित्सकीय सलाह के इनका उपयोग नुकसानदायक भी हो सकता है।

माता-पिता की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किशोरावस्था में बेटी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहें, चेहरे पर अत्यधिक मुंहासे हों, वजन तेजी से बढ़ रहा हो या अनचाहे बाल आने लगें, तो इसे सामान्य मानकर टालना उचित नहीं है। समय पर जांच और सही सलाह भविष्य की अनेक जटिलताओं से बचा सकती है।

आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि सुंदरता केवल चेहरे की चमक से नहीं, बल्कि स्वस्थ हार्मोन, मजबूत शरीर और संतुलित मानसिक स्वास्थ्य से आती है। PCOD कोई अभिशाप नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना निश्चित रूप से नुकसानदायक हो सकता है।

याद रखिए—पीरियड्स शरीर का मासिक रिपोर्ट कार्ड हैं। यदि यह रिपोर्ट बार-बार खराब आ रही है, तो केवल तारीख बदलने का इंतजार न करें, कारण जानने के लिए विशेषज्ञ से अवश्य मिलें। क्योंकि सही समय पर उठाया गया एक कदम, भविष्य के स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी शुरुआत बन सकता है।

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