आयुम इंजीनियरिंग प्रबंधन और श्रमिकों के बीच समझौता, पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में मिला मजदूरों का हक



रायपुर/बीरगांव। बीरगांव के बोरझारा स्थित आयुम इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और वहाँ के श्रमिकों के बीच चल रहा विवाद गुरुवार को सुखद मोड़ पर समाप्त हो गया। पार्षद बेदराम साहू के नेतृत्व में शुरू की गई हक की लड़ाई रंग लाई और कंपनी प्रबंधन ने मजदूरों के साथ बातचीत के बाद उनके बकाया भुगतान और अधिकारों को देने पर सहमति जताई। इस बड़ी सफलता के बाद मजदूरों में खुशी की लहर है और 30 अप्रैल को प्रस्तावित उग्र घेराव व प्रदर्शन को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि पार्षद बेदराम साहू ने मजदूरों को बिना नोटिस काम से निकालने और उनके वेतन व ईएसआई-पीएफ (ESIC-PF) की राशि न देने के विरोध में 30 अप्रैल को फैक्ट्री के घेराव की चेतावनी दी थी। इस दबाव का असर यह हुआ कि निर्धारित तिथि से पूर्व ही प्रबंधन बातचीत की मेज पर आया। गुरुवार को हुई निर्णायक चर्चा के बाद प्रबंधन ने मजदूरों के अधिकारों का पैसा देने का निर्णय लिया, जिसे श्रमिकों ने अपनी बड़ी जीत बताया है।
मजदूरों के हक में खड़े हुए राजीव गांधी वार्ड के पार्षद बेदराम साहू ने इस जीत पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब श्रमिकों के अधिकार की बात आती है, तो एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार होती है। उन्होंने इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने के लिए प्रिंट मीडिया, न्यूज चैनलों और डिजिटल मीडिया के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। साहू ने कहा कि मीडिया ने इस विषय को प्रमुखता से उठाकर मजदूरों की आवाज को शासन-प्रशासन और प्रबंधन तक पहुँचाया।
पार्षद बेदराम साहू ने माँ बंजारी मण्डल के अध्यक्ष भागीरथी यादव के विशेष सहयोग की सराहना की। साथ ही उन्होंने मजदूर हितैषी साथियों—अश्वनी जंघेल, राजू साहू, ओमप्रकाश साहू, जीवन साहू, टेकराम वर्मा और पार्षद अश्वनी चान्दरे सहित उन सभी भाई-बहनों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
इस सफल समझौते के बाद पार्षद बेदराम साहू (अध्यक्ष तहसील साहू संघ बीरगांव एवं अध्यक्ष माँ बंजारी मण्डल किसान मोर्चा भाजपा) ने स्पष्ट किया कि चूँकि मजदूरों की मांगें पूरी हो चुकी हैं, इसलिए अब आंदोलन का कोई औचित्य नहीं रह गया है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना सबकी प्राथमिकता है।











