लंबे संघर्ष के बाद चमके कसडोल के आलोक मिश्रा, सरकारी शिक्षक से बने छत्तीसगढ़ सिनेमा के चर्चित विलेन

चंदन जायसवाल 

कसडोल। प्रतिभा और मेहनत के दम पर हर मंजिल हासिल की जा सकती है। इसका जीता-जागता उदाहरण कसडोल के आलोक मिश्रा हैं, जिन्होंने लंबे संघर्ष के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है।

आलोक मिश्रा ने वर्ष 2001-02 में छत्तीसगढ़ी फिल्म “छत्तीसगढ़ महतारी” से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगभग 20 वर्षों के निरंतर संघर्ष, मेहनत और समर्पण के बाद आज वे छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग के चर्चित विलेन कलाकारों में अपनी पहचान बना चुके हैं।

पेशे से सरकारी शिक्षक होने के बावजूद आलोक मिश्रा ने अभिनय के प्रति अपने जुनून को जीवित रखा। वर्तमान में वे 14 से 15 से अधिक छत्तीसगढ़ी फिल्मों में खलनायक (विलेन) की दमदार भूमिका निभा चुके हैं। उनके प्रभावशाली अभिनय और सशक्त संवाद अदायगी को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। Zee 5 ott में जनावर जैसे वेब सीरिज में काम किए है ले चलो अमिरका जैसे मूवी में अपना भूमिका निभा चुके है अब बॉलीवुड में भी उनकी पहचान बनती जा रही है

कसडोल क्षेत्र के लिए यह गर्व की बात है कि यहां की प्रतिभा आज प्रदेश के फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बना रही है। आलोक मिश्रा की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

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